हरियाणा में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, भारत बनेगा दुनिया का पांचवां देश
हरियाणा में चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
भारत दुनिया का पांचवां देश बनेगा, 1 घंटे में दौड़ेगी 140 किमी, प्रदूषण शून्य
सोनीपत। भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल होने जा रहा है, जहां हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेनें पटरियों पर दौड़ेंगी। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद-गोहाना-सोनीपत ट्रैक पर चलाई जाएगी। इसके साथ ही भारत, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद दुनिया का पांचवां देश बन जाएगा जिसने इस अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन होगी। इसमें 2,638 यात्री एक साथ यात्रा कर सकेंगे और यह 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित इस ट्रेन से केवल पानी और भाप का उत्सर्जन होगा, जिससे प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा।

रेल मंत्री ने वीडियो जारी किया
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर इस ट्रेन का वीडियो साझा किया, जिसमें इसकी डिजाइन और विशेषताओं को दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।
Bharat’s Hydrogen Journey !
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) August 13, 2025
For the first time in India a hydrogen-powered train is set for its final commissioning, a landmark that showcases India’s rise as a technological powerhouse, driving innovation on the global stage. 🇮🇳#HydrogenTrain pic.twitter.com/RGwt5COKIC
तकनीकी खूबियां और निर्माण
- ट्रेन का कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किया गया है।
- हाल ही में इसका ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- 1,200 हार्सपावर की ताकत के साथ यह ट्रेन हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक में भारत को अग्रणी बनाएगी।
- रेलवे “Hydrogen for Heritage” योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है।
- प्रत्येक ट्रेन की लागत लगभग 80 करोड़ रुपये होगी, जबकि विरासत व पहाड़ी मार्गों के बुनियादी ढांचे के लिए प्रति मार्ग 70 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।

जींद बनेगा हाइड्रोजन उत्पादन केंद्र
इस ट्रेन को ईंधन देने के लिए जींद में 1 मेगावाट पॉलिमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।
- यह प्लांट रोजाना लगभग 430 किलो हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा।
- जींद स्टेशन पर 3,000 किलो हाइड्रोजन भंडारण की क्षमता होगी।
- इसमें कंप्रेसर और प्री-कूलर इंटीग्रेशन वाले दो डिस्पेंसर लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेन को तेज और सुरक्षित तरीके से ईंधन भरा जा सकेगा।

भारत के लिए महत्व
यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और स्वदेशी नवाचार के क्षेत्र में भी एक बड़ी छलांग है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन में वैश्विक पहचान मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
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