भारत-चीन रिश्तों में नया अध्याय: पीएम मोदी की संभावित चीन यात्रा पर ग्लोबल टाइम्स का बयान
नई दिल्ली — चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित चीन यात्रा को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है और कहा है कि भारत और चीन के बीच बढ़ती नज़दीकी केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित होगी। अख़बार का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन जाते हैं, तो इससे द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आएगी और वैश्विक परिदृश्य में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
चीन में पीएम मोदी का स्वागत करने को उत्सुक ग्लोबल टाइम्स
ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि वह भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। यह टिप्पणी उस समय आई है जब कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थान मोदी की इस यात्रा को अमेरिका के खिलाफ एक तरह का “रणनीतिक बचाव” बताने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन के सरकारी मुखपत्र ने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा कि मुक्त व्यापार की रक्षा करना और एकतरफा टैरिफ नीतियों का विरोध करना, आज दुनिया के अधिकांश देशों की साझा सोच है। ऐसे में, प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा का मकसद केवल किसी देश के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग और संतुलन को बढ़ावा देना है।

एससीओ सम्मेलन और तियानजिन का महत्व
चीन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। हालांकि, पीएम मोदी की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन ग्लोबल टाइम्स और चीन के विदेश मंत्रालय के संकेतों से स्पष्ट है कि बीजिंग इस यात्रा को लेकर बेहद सकारात्मक है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि सभी सदस्य देशों के संयुक्त प्रयास से तियानजिन शिखर सम्मेलन “एकजुटता, मित्रता और सार्थक परिणामों” का प्रतीक बनेगा और एससीओ एक नए विकास चरण में प्रवेश करेगा।
गलवान संघर्ष से रिश्तों में आई दरार
2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष ने भारत-चीन रिश्तों को गहरी चोट पहुंचाई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और सीमा विवादों ने सहयोग के रास्ते लगभग बंद कर दिए थे। व्यापार और राजनीतिक वार्ताएं सीमित हो गईं और सैन्य स्तर पर भी तनाव बना रहा।

चार साल बाद रिश्तों में सुधार की शुरुआत
हालांकि, 2024 में कज़ान में हुई बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के बाद हालात बदलने शुरू हुए। इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच संवाद के नए रास्ते खुले।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले महीनों में चीन का दौरा किया, जिससे विश्वास बहाली की प्रक्रिया तेज हुई। अब सात साल बाद प्रधानमंत्री मोदी के चीन जाने की संभावना बन रही है, जो दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है।

ट्रंप की टैरिफ नीति और बदलता भू-राजनीतिक माहौल
ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत-चीन की नज़दीकी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा टैरिफ नीति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता पैदा की है। चीन इस मौके का इस्तेमाल भारत के साथ संबंध सुधारने और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए करना चाहता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच सहयोग न केवल एशिया में, बल्कि पूरी दुनिया में आर्थिक स्थिरता और शांति को मजबूत करेगा।

दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, अगर भारत और चीन अपने मतभेद भुलाकर आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रखते हैं। ऐसे में, आपसी सहयोग से मुक्त व्यापार, तकनीकी आदान-प्रदान, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस पहल संभव है।
कूटनीतिक संकेत और भविष्य की संभावनाएं
चीन के मीडिया और विदेश मंत्रालय के बयानों से साफ है कि बीजिंग इस यात्रा को लेकर काफी उत्साहित है। अगर यह यात्रा होती है, तो यह न केवल भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत होगी, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़े बदलाव ला सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह यात्रा दोनों देशों के लिए व्यापार, निवेश, सीमा प्रबंधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में नए समझौते करने का अवसर होगी।
— स्वदेश ज्योति