हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: भूस्खलन और बादल फटने से 13 की मौत, कई लापता
नई दिल्ली। उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश ने एक बार फिर तबाही मचाई है। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में मणिमहेश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं पर पहाड़ से गिरे पत्थरों और भूस्खलन ने कहर बरपाया। वहीं उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी गढ़वाल जिले में बादल फटने की घटनाओं ने हालात गंभीर बना दिए हैं। अब तक कुल 13 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लापता बताए जा रहे हैं।

मणिमहेश यात्रा पर श्रद्धालुओं की मौत
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मणिमहेश यात्रा पर गए 11 श्रद्धालुओं की भूस्खलन के कारण मौत हो गई। मृतकों में 3 पंजाब, 1 उत्तर प्रदेश और 5 चंबा जिले के रहने वाले शामिल हैं। दो मृतकों की अभी पहचान नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि इन मौतों की वजह न सिर्फ पत्थरों का गिरना था, बल्कि ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी भी रही।
भरमौर में इस समय करीब 3 हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं। प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी इसी मार्ग पर हुए भूस्खलन में 7 श्रद्धालुओं की मौत और 9 लोग लापता हो गए थे।

उत्तराखंड में बादल फटा, नदियों का बढ़ा जलस्तर
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी गढ़वाल जिलों में गुरुवार देर रात बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
- रुद्रप्रयाग: अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराया जा रहा है। बद्रीनाथ हाईवे डूब जाने से श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।
- चमोली: कई परिवार मलबे के कारण घरों में फंसे हैं। यहां राहत दल को गांव-गांव पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- टिहरी गढ़वाल: कई इलाकों में पानी भर गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
केदारनाथ घाटी के लावारा गांव में मोटर मार्ग पर बना पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
एसडीआरएफ और बचाव अभियान
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार में भारी बारिश के बाद बादल फटने से कई लोग मलबे में दब गए। यहां बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की टीम को रवाना किया गया है। हालांकि जगह-जगह मलबा जमा होने के कारण बचावकर्मियों को गांव तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकता के तौर पर लोगों को सुरक्षित निकालना और फंसे हुए परिवारों तक जल्द से जल्द राहत पहुंचाना है। सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत कार्य कर रहे हैं।
हालात गंभीर, अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने हिमाचल और उत्तराखंड के कई जिलों में अगले 48 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जलवायु परिवर्तन का बड़ा संकेत हैं, जिनसे पर्वतीय इलाकों की संवेदनशीलता और जोखिम और बढ़ गया है।
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