अगर आप आज के बच्चों को ध्यान से देखें और उनकी तुलना कुछ दशक पहले की पीढ़ी से करें, तो एक फर्क साफ नजर आता है। पहले के मुकाबले आज कई बच्चे उम्र के हिसाब से छोटे कद के दिखाई देने लगे हैं। यह केवल एक धारणा नहीं, बल्कि कई अध्ययनों और डॉक्टरों की राय से सामने आई एक गंभीर सच्चाई है। भारत जैसे विशाल देश में जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं बच्चों की शारीरिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

लंबाई केवल दिखावट से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चे के संपूर्ण विकास, पोषण स्तर और भविष्य के स्वास्थ्य का संकेत होती है। जब किसी समाज में बड़ी संख्या में बच्चे अपेक्षित लंबाई तक नहीं पहुंच पाते, तो यह उस समाज की जीवनशैली, खानपान और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।


बच्चों की लंबाई क्यों रुक रही है

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की लंबाई रुकने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण पोषण की कमी माना जा रहा है। आज के समय में बच्चों का पेट तो भर रहा है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हैं। बाहर का तला-भुना खाना, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और मीठे पेय पदार्थ बच्चों के भोजन का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं।

इस तरह का भोजन पेट तो भर देता है, लेकिन हड्डियों और मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी तत्वों की पूर्ति नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि बच्चे उम्र के अनुसार लंबाई नहीं पकड़ पाते।


पोषण की कमी सबसे बड़ी वजह

बच्चों की लंबाई बढ़ने में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और खनिज तत्वों की अहम भूमिका होती है। लेकिन कई घरों में बच्चों का भोजन संतुलित नहीं होता। दूध, दाल, हरी सब्जियां और फल की जगह फास्ट फूड ने ले ली है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई बच्चे पर्याप्त भोजन से वंचित हैं, जबकि शहरी इलाकों में भोजन की गुणवत्ता खराब हो चुकी है। दोनों ही स्थितियों में बच्चों के विकास पर सीधा असर पड़ता है।


मोबाइल और बैठी हुई जीवनशैली का असर

आज के बच्चे पहले की तुलना में बहुत कम शारीरिक गतिविधि करते हैं। खेल के मैदान की जगह मोबाइल और स्क्रीन ने ले ली है। घंटों बैठकर मोबाइल देखने से न केवल आंखों और दिमाग पर असर पड़ता है, बल्कि शरीर की वृद्धि भी प्रभावित होती है।

शारीरिक गतिविधि की कमी से हड्डियां मजबूत नहीं हो पातीं और शरीर का प्राकृतिक विकास रुकने लगता है। यही कारण है कि कई बच्चे उम्र के हिसाब से कमजोर और छोटे दिखाई देते हैं।


नींद की कमी भी रोक रही है लंबाई

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की लंबाई बढ़ने में नींद की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। गहरी नींद के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं जो हड्डियों और मांसपेशियों के विकास में मदद करते हैं।

लेकिन देर रात तक जागना, मोबाइल का ज्यादा उपयोग और अनियमित दिनचर्या बच्चों की नींद खराब कर रही है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर का विकास भी प्रभावित होता है।


माता-पिता की अनदेखी भी बन रही कारण

कई बार माता-पिता बच्चों की लंबाई को केवल आनुवंशिक कारण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। वे सोचते हैं कि माता-पिता छोटे हैं तो बच्चा भी छोटा ही रहेगा। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि सही पोषण और जीवनशैली से लंबाई में काफी सुधार किया जा सकता है।

समय रहते बच्चे के विकास पर ध्यान न दिया जाए, तो बाद में सुधार करना मुश्किल हो जाता है।


मानसिक तनाव का भी पड़ता है असर

आज के बच्चों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और अपेक्षाओं का दबाव पहले से कहीं ज्यादा है। लगातार तनाव में रहने से शरीर के विकास पर नकारात्मक असर पड़ता है। तनाव शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे लंबाई बढ़ने की प्रक्रिया बाधित होती है।


क्या भविष्य में यह समस्या और बढ़ेगी

अगर खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। छोटे कद के साथ कमजोर हड्डियां और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।


समाधान क्या है?

  1. बच्चों को संतुलित और पोषण से भरपूर भोजन देना जरूरी है।
  2. रोजाना नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  3. बच्चों की नींद पूरी और समय पर हो, इसका विशेष ध्यान रखें।
  4. बच्चों के आसपास तनाव मुक्त और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
  5. माता-पिता बच्चों की थाली में पोषण को प्राथमिकता दें।
  6. मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन का उपयोग सीमित करें।

निष्कर्ष

भारतीय बच्चों की लंबाई का घटना एक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह केवल बच्चों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है। सही समय पर जागरूकता और बदलाव ही इस समस्या का समाधान है।