पेट का कैंसर अक्सर सामान्य गैस या अपच जैसा दिखता है, समय रहते पहचान जरूरी
दुनिया भर में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इन्हीं में एक खतरनाक बीमारी है पेट का कैंसर। यह रोग इसलिए अधिक गंभीर माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं जैसे प्रतीत होते हैं। अधिकतर लोग पेट फूलने, गैस, अपच या थकान को मामूली मानकर अनदेखा कर देते हैं। परिणामस्वरूप बीमारी का पता तब चलता है जब यह काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
कैंसर संबंधी जानकारी देने वाली संस्था अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो उपचार अपेक्षाकृत सरल हो सकता है।
बार-बार पेट फूलना और भारीपन
सबसे आम और दिखने में सामान्य लक्षण है पेट का बार-बार फूलना। मसालेदार या भारी भोजन के बाद हल्का पेट फूलना सामान्य माना जा सकता है, लेकिन यदि थोड़ी मात्रा में खाना खाने पर भी पेट भरा-भरा लगे या लगभग प्रतिदिन भारीपन और जकड़न महसूस हो, तो यह सामान्य संकेत नहीं है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पेट के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में भोजन को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे पाचन धीमा हो जाता है और पेट में असामान्य भारीपन बना रहता है। आयुर्वेद के अनुसार, जब पाचन अग्नि कमजोर पड़ती है तो शरीर में असंतुलन उत्पन्न होता है। यदि खान-पान में बदलाव के बाद भी समस्या बनी रहे, तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
लगातार थकान और कमजोरी
दूसरा महत्वपूर्ण लक्षण है बिना स्पष्ट कारण के लगातार थकान महसूस होना। आज की व्यस्त जीवनशैली में थकान को सामान्य समझ लिया जाता है, लेकिन यदि पर्याप्त आराम और नींद के बाद भी शरीर में कमजोरी बनी रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
पेट के कैंसर में कभी-कभी अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है, जो बाहरी रूप से दिखाई नहीं देता। इससे शरीर में खून और आयरन की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया की स्थिति बनती है। इसके साथ चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टि से इसे शरीर की ऊर्जा क्षीण होने का संकेत माना जाता है।
अचानक वजन घटना और जल्दी पेट भर जाना
तीसरा संकेत है बिना किसी प्रयास के वजन का कम होना और थोड़ी मात्रा में भोजन करने पर ही पेट भर जाना। यदि व्यक्ति सामान्य भोजन कर रहा हो, लेकिन कुछ कौर के बाद ही पूर्णता का अनुभव करे, तो यह चिंताजनक हो सकता है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा का अधिक उपयोग करती हैं, जिससे वजन तेजी से गिर सकता है। भोजन के मार्ग में आंशिक अवरोध भी जल्दी पेट भरने का कारण बन सकता है। आयुर्वेद इसे शरीर के संतुलन में गंभीर गड़बड़ी का संकेत मानता है।
बार-बार मितली या उल्टी जैसा अनुभव
चौथा महत्वपूर्ण लक्षण है बार-बार मितली आना या उल्टी जैसा महसूस होना। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन यदि बिना स्पष्ट कारण यह समस्या लगातार बनी रहे, तो सतर्क रहना चाहिए। कुछ लोगों को भोजन के तुरंत बाद उल्टी हो सकती है, तो कुछ को सुबह खाली पेट मितली आती है।
यह पेट की अंदरूनी परत में सूजन या जलन के कारण हो सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य हो जाता है।
समय पर जांच से बचाव संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच कराना ही सबसे बड़ा बचाव है। प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर उपचार के विकल्प अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
पेट से जुड़े लगातार या असामान्य लक्षणों को केवल गैस या अपच समझकर टाल देना जोखिम भरा हो सकता है। जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/02/26/ppppppp-2026-02-26-13-46-41.jpg)