गेहूं से ज्यादा सेहतमंद ज्वार-रागी, जानिए पोषण और फायदे
आजकल खराब खानपान और जीवनशैली के कारण लोग पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज सेहत के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आए हैं।
आजकल खराब खानपान और जीवनशैली के कारण लोग पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज सेहत के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आए हैं।
ज़रूरत की खबर क्यों है यह?
ज्वार और रागी पचने में हल्के होते हैं और शरीर पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालते। यह अनाज लंबे समय तक ऊर्जा देता है और पेट को स्वस्थ रखता है।
गेहूं की जगह ज्वार-रागी क्यों?
ज्वार में रेशा, खनिज और ऊर्जा देने वाले तत्व पाए जाते हैं। यह पाचन सुधारने और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है।
ज्वार के पोषक तत्व
रागी में हड्डियों को मज़बूत बनाने वाले तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
रागी का पोषण महत्व
ज्वार और रागी का नियमित सेवन वजन संतुलन में मदद करता है, पाचन सुधारता है और शरीर को अंदर से मज़बूत बनाता है।
सेहत को मिलने वाले फायदे
जिन लोगों को पाचन बहुत कमजोर रहता है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें ज्वार और रागी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
ज्वार और रागी की रोटी, दलिया या पतला घोल बनाकर इन्हें रोज़ के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
रोज़मर्रा के भोजन में कैसे शामिल करें?
अगर सही मात्रा और सही तरीके से ज्वार और रागी का सेवन किया जाए, तो गेहूं की जगह यह अनाज स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
सही जानकारी से बेहतर स्वास्थ्य