सावधान! कहीं आप रसायन से पका केला तो नहीं खा रहे? इन 5 तरीकों से करें पहचान
कुछ व्यापारी कच्चे केले को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक रसायन का उपयोग करते हैं। इससे केला बाहर से पीला दिखता है, लेकिन अंदर से पूरी तरह प्राकृतिक नहीं होता।
कुछ व्यापारी कच्चे केले को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक रसायन का उपयोग करते हैं। इससे केला बाहर से पीला दिखता है, लेकिन अंदर से पूरी तरह प्राकृतिक नहीं होता।
रसायन से पका केला क्या होता है
रसायन से पका केला खाने से पेट, सिर और शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। लंबे समय तक सेवन से गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।
यह केला स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक है
इस तरह का केला बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर शरीर वाले लोगों के लिए अधिक हानिकारक होता है। उनकी पाचन शक्ति जल्दी प्रभावित होती है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा नुकसान
ऐसे केले का रंग बहुत ज्यादा चमकीला होता है, जबकि अंदर से वह कच्चा या सख्त रह सकता है। प्राकृतिक केला धीरे-धीरे समान रूप से पकता है।
पहचान तरीका 1 – रंग और बनावट देखें
रसायन से पके केले में प्राकृतिक मिठास वाली खुशबू नहीं होती। उसका स्वाद भी अक्सर फीका या अजीब लगता है।
पहचान तरीका 2 – खुशबू पर ध्यान दें
प्राकृतिक केले के छिलके पर हल्के भूरे धब्बे होते हैं, जबकि रसायन से पके केले का छिलका एकदम साफ और असामान्य रूप से चिकना होता है।
पहचान तरीका 3 – छिलके के धब्बे देखें
रसायन से पका केला जल्दी सड़ जाता है। खरीदने के कुछ ही समय बाद उसमें काले धब्बे और बदबू आने लगती है।
पहचान तरीका 4 – जल्दी खराब होना
हमेशा मौसमी और स्थानीय फल खरीदें। बहुत ज्यादा चमकीले फलों से बचें और घर पर रखकर धीरे पकने दें, ताकि जोखिम कम हो।
सुरक्षित रहने के आसान उपाय