मकर संक्रांति पर तिल-गुड़, सेहत का देसी खजाना

मकर संक्रांति का त्योहार केवल पतंग उड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर और स्वास्थ्य की देखभाल से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन तिल और गुड़ खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

ठंड से सुरक्षा

सर्दियों के मौसम में शरीर जल्दी ठंड पकड़ लेता है, जिससे कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखती है।

मजबूत पाचन

ठंड और गलत खानपान के कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। तिल-गुड़ खाने से पाचन शक्ति बेहतर होती है। यह पेट को साफ रखता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

हड्डियों की ताकत

सर्दियों में जोड़ों का दर्द और अकड़न आम समस्या बन जाती है। तिल में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व हड्डियों को मजबूती देते हैं। तिल-गुड़ खाने से शरीर में लचीलापन बना रहता है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

बढ़ी हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को जल्दी बीमार बना देती है। तिल-गुड़ खाने से शरीर की अंदरूनी ताकत बढ़ती है। यह मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है और शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।

खून और ऊर्जा

गुड़ आयरन का अच्छा स्रोत माना जाता है। तिल-गुड़ खाने से खून की कमी दूर करने में मदद मिलती है। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।

त्वचा और बाल

तिल-गुड़ शरीर को अंदर से साफ रखता है। इसका असर त्वचा और बालों पर साफ दिखाई देता है। त्वचा में निखार आता है और बाल मजबूत बनते हैं।

मानसिक शांति

भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम हो गया है। तिल-गुड़ खाने से मन शांत रहता है। यह थकान को कम करता है और सकारात्मक सोच बनाए रखने में मदद करता है।