August 30, 2025 5:29 PM

अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब: 5% और 18% का प्रस्ताव

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जीएसटी स्लैब में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 5% और 18% टैक्स, लग्जरी वस्तुओं पर 40% टैक्स का प्रस्ताव

12% और 28% स्लैब खत्म करने पर मंत्री समूह की सहमति, लग्जरी वस्तुओं पर 40% तक टैक्स की सिफारिश
बीमा पर जीएसटी पूरी तरह हटाने का भी सुझाव

नई दिल्ली। देश की कर प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद के मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने जीएसटी की मौजूदा चार दरों को घटाकर दो मुख्य स्लैब — 5% और 18% — करने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही लग्जरी और ‘सिन गुड्स’ (जैसे तंबाकू, एयरोनेटेड ड्रिंक्स और हाई-एंड कारें) पर 40% तक टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव अब अंतिम निर्णय के लिए जीएसटी काउंसिल के पास भेजा गया है।

क्या है मौजूदा स्थिति?

वर्तमान में जीएसटी की चार दरें हैं — 5%, 12%, 18% और 28%। जीओएम ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए 12% और 28% स्लैब को खत्म कर केवल 5% और 18% को बनाए रखने की सिफारिश की है।

किसने की अगुवाई?

इस बैठक की अध्यक्षता बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। जीओएम में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल के मंत्री भी शामिल थे। सभी राज्यों ने अपने-अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं। कुछ राज्यों ने प्रस्ताव पर आपत्ति भी जताई, लेकिन अधिकांश ने इसे समर्थन दिया।


किन वस्तुओं पर कितना टैक्स घटेगा?

✅ 12% से 5% जीएसटी:

इन वस्तुओं पर टैक्स घटकर 5% हो सकता है:

  • ब्रांडेड नमकीन, सूखे मेवे, टूथपेस्ट, साबुन, हेयर ऑयल
  • सामान्य एंटीबायोटिक और पेनकिलर दवाएं
  • प्रोसेस्ड फूड, स्नैक्स, फ्रोजन सब्जियां
  • मोबाइल फोन के कुछ मॉडल, कंप्यूटर
  • सिलाई मशीन, प्रेशर कुकर, गीजर, पानी के फिल्टर, इलेक्ट्रिक आयरन
  • रेडीमेड कपड़े (₹1000 से ऊपर), जूते (₹500–₹1000)
  • वैक्सीन, टीबी/एचआईवी डायग्नोस्टिक किट
  • साइकिल, बर्तन, ज्योमेट्री बॉक्स, नक्शे, ग्लोब
  • ग्लेज्ड टाइल्स, वेंडिंग मशीन, कृषि उपकरण, सोलर वॉटर हीटर
  • सार्वजनिक परिवहन वाहन

👉 इन वस्तुओं की कीमतें घट सकती हैं, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।


✅ 28% से 18% जीएसटी:

इन वस्तुओं पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है:

  • सीमेंट और निर्माण सामग्री
  • ब्यूटी प्रोडक्ट्स, चॉकलेट
  • टीवी, फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर
  • निजी विमान, रेडी-मिक्स कंक्रीट
  • प्रोटीन पाउडर, कॉफी सिरप, चीनी सिरप
  • प्लास्टिक उत्पाद, रबर टायर, एल्युमिनियम फॉयल
  • टेम्पर्ड ग्लास, प्रिंटर, रेजर, डेंटल फ्लॉस, मैनिक्योर किट

👉 इससे निर्माण उद्योग, उपभोक्ताओं और व्यापारियों को राहत मिलेगी।


कब लागू होगा नया जीएसटी स्ट्रक्चर?

यह सिफारिश अब जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में रखी जाएगी, जो सितंबर या अक्टूबर 2025 में होने की संभावना है। यदि काउंसिल 75% बहुमत से इसे मंजूरी देती है तो:

  • केंद्र व राज्य सरकारें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करेंगी।
  • नई दरें 2026 की शुरुआत से लागू हो सकती हैं।
  • व्यापारियों और उपभोक्ताओं को पहले से इसकी सूचना दी जाएगी।

बीमा पर पूरी तरह छूट का सुझाव

बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए।
ज्यादातर राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। लेकिन शर्त यह रखी गई कि बीमा कंपनियां इस छूट का लाभ वास्तव में उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।


विशेषज्ञ की राय: आम आदमी के लिए राहत

आरजी द्विवेदी (पूर्व निदेशक, पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज) ने कहा कि:

“जीएसटी स्लैब में कमी आम जनता के लिए एक प्रकार का तोहफा है। इससे आवश्यक वस्तुएं सस्ती होंगी और कर प्रणाली सरल होगी। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को जो संकेत दिया था, उसके अनुसार यह बदलाव दिवाली तक भी लागू हो सकता है।”


सरकार को कितना नुकसान?

सरकार का अनुमान है कि इन टैक्स कटौतियों से सालाना लगभग ₹80,000 करोड़ का राजस्व घाटा होगा।
हालांकि, लग्जरी वस्तुओं पर 40% तक टैक्स लगाकर इस घाटे को आंशिक रूप से संतुलित किया जा सकता है।


किन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ?

  • कपड़ा उद्योग
  • कृषि और उर्वरक क्षेत्र
  • अक्षय ऊर्जा
  • हस्तशिल्प
  • स्वास्थ्य और बीमा क्षेत्र
  • निर्माण उद्योग
  • एफएमसीजी कंपनियां
  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण

बदलाव का उद्देश्य:

  • कर प्रणाली को सरल बनाना
  • उपभोक्ताओं को राहत देना
  • व्यापारियों के लिए अनुपालन आसान बनाना
  • दरों को उपभोग पैटर्न के अनुसार संतुलित करना

जीएसटी दरों में प्रस्तावित यह बड़ा बदलाव आम जनता, व्यापार जगत और सरकार — तीनों के लिए महत्वपूर्ण है। जहां एक ओर उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सस्ती मिलेंगी, वहीं सरकार को राजस्व में कमी की भरपाई के लिए रणनीतिक फैसले लेने होंगे। अब देश की निगाहें जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी।



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