कार्यस्थल पर सत्ता संतुलन और आरोपों की जटिलता पर आधारित फिल्म 27 फरवरी को नेटफ्लिक्स पर होगी प्रदर्शित
अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा अपनी आगामी फिल्म ‘एक्यूज्ड’ को लेकर उत्साहित नजर आ रही हैं। फिल्म के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसी कहानियां हैं, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं और उन्हें सामने लाना जरूरी है। उनके अनुसार सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सोच को झकझोरने और स्थापित धारणाओं को चुनौती देने का भी जरिया है।
‘एक्यूज्ड’ कार्यस्थल पर महिलाओं के बीच सत्ता संतुलन, यौन उत्पीड़न के आरोपों और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को केंद्र में रखती है। यह फिल्म 27 फरवरी को नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित होने वाली है।
पारंपरिक धारणा को चुनौती देती है कहानी
कोंकणा ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस फिल्म की पटकथा आम सोच को उलट देती है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर समाज में महिलाओं को पीड़ित या संघर्षशील के रूप में देखा जाता है, लेकिन आरोपी के रूप में बहुत कम। आंकड़ों के अनुसार अधिकांश अपराध पुरुषों द्वारा किए जाते हैं, यह तथ्यात्मक सत्य है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि महिलाएं कभी आरोपी नहीं हो सकतीं।
फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगता है। यहां आरोपी भी महिला है और कथित पीड़ित भी महिला। इस असामान्य परिस्थिति के माध्यम से फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि सत्ता, उम्र और पद की असमानता रिश्तों को किस तरह प्रभावित करती है।
रिश्तों का ‘ग्रे’ पक्ष
कोंकणा के अनुसार ‘एक्यूज्ड’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कहानी को काले और सफेद के सरल खांचे में नहीं रखती। यह पूरी तरह से ‘ग्रे’ क्षेत्र की कहानी है, जहां कोई भी पात्र पूरी तरह निर्दोष या पूरी तरह दोषी नजर नहीं आता।
उन्होंने कहा कि जब किसी महिला पर शोषण का आरोप लगता है, तो समाज के लिए उस पर विश्वास करना कठिन हो जाता है, विशेषकर तब जब आरोपी का पद मजबूत हो और संबंधों में शक्ति का असंतुलन हो। फिल्म इन जटिलताओं को बिना उपदेश दिए सामने रखती है और दर्शकों को स्वयं निष्कर्ष निकालने का अवसर देती है।
सामाजिक विमर्श को आगे बढ़ाने का प्रयास
अभिनेत्री का मानना है कि सिनेमा का दायित्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। ऐसी कहानियां समाज के भीतर छिपे पूर्वाग्रहों और धारणाओं को उजागर करती हैं। ‘एक्यूज्ड’ उन अनदेखे पहलुओं को सामने लाती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
फिल्म में दो महिलाओं के बीच सत्ता का खेल, उम्र का अंतर और पेशेवर रिश्तों की जटिलता को संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है। यह दर्शाती है कि शक्ति का दुरुपयोग किसी भी लिंग द्वारा हो सकता है और हर मामले को उसके संदर्भ में समझना जरूरी है।
27 फरवरी को डिजिटल मंच पर रिलीज होने वाली यह फिल्म दर्शकों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बन सकती है। कोंकणा सेन शर्मा का कहना है कि यदि फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर कर सके और संवाद की शुरुआत कर सके, तो उसका उद्देश्य सफल माना जाएगा।
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