- वर्ष 2025 की शुरुआत से ही धीरे-धीरे केस सामने आ रहे थे, लेकिन अब संख्या तेजी से बढ़ती जा रही
- महिला को चार दिन पहले खांसी और सर्दी की शिकायत पर जांच के लिए लाया गया था
भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। वर्ष 2025 की शुरुआत से ही धीरे-धीरे केस सामने आ रहे थे, लेकिन अब संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। जनवरी से जून तक कुल 200 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। हाल ही में जबलपुर में एक महिला की मौत और चार नए संक्रमितों की पहचान ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
जबलपुर में गर्भवती महिला की मौत, नवजात बच्चा उपचाराधीन
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती मंडला निवासी गर्भवती महिला की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई है। महिला को चार दिन पहले खांसी और सर्दी की शिकायत पर जांच के लिए लाया गया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसका ऑपरेशन कराकर शिशु जन्म कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। फिलहाल नवजात शिशु को बच्चा वार्ड में आइसोलेशन में रखा गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अब तक 200 संक्रमित, 132 एक्टिव केस
प्रदेश में जनवरी से अब तक कुल 200 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इनमें से 64 मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि 132 मरीज फिलहाल एक्टिव केस हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ताज़ा मामला जबलपुर से सामने आया है। वहीं, अन्य दो संक्रमित मरीज भी जबलपुर और उसके आसपास के क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।
सरकार अलर्ट, ऑक्सीजन स्टॉक और आइसोलेशन वार्ड तैयार
राज्य सरकार ने बढ़ते मामलों को देखते हुए कोविड नियंत्रण की तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। दवाइयों का स्टॉक, ऑक्सीजन की उपलब्धता, आइसोलेशन वार्ड, और जांच की व्यवस्था को फिर से सक्रिय कर दिया गया है।
संक्रमण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चालू
सरकार ने संक्रमण को सीमित रखने के लिए ‘सतर्क नागरिक - सुरक्षित समाज’ जैसे जन-जागरूकता अभियानों की शुरुआत की है। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है और सर्दी-खांसी या बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की अपील की जा रही है।
विशेषज्ञों की राय: लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही संक्रमण की तीव्रता पूर्व की लहरों जैसी नहीं है, लेकिन गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज अब भी उच्च जोखिम में हैं। समय रहते जांच और इलाज जरूरी है।
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