छिंदवाड़ा में 25 बच्चों की मौत का मामला, परासिया न्यायालय ने 10 दिन की रिमांड पर भेजा

कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में कंपनी मालिक गोविंदन रंगनाथन नहीं दे रहा स्पष्ट जवाब, एसआईटी की गहन पूछताछ जारी

छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 25 मासूम बच्चों की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। इस दर्दनाक प्रकरण के केंद्र में है — श्रेसन फार्मा कंपनी का मालिक और निदेशक गोविंदन रंगनाथन, जो फिलहाल पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) की सख्त पूछताछ के घेरे में है।

रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार कर शुक्रवार को परासिया न्यायालय में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड (20 अक्टूबर तक) पर भेज दिया है। फिलहाल वह छिंदवाड़ा पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम के सवालों के बीच खामोश है और जांच में स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा।


जांच में सहयोग नहीं कर रहा रंगनाथन

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रंगनाथन से जब दवा निर्माण प्रक्रिया, वितरण चैनल और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े सवाल पूछे गए, तो वह बार-बार या तो चुप रहा या अस्पष्ट जवाब देता रहा।
अदालत में पेशी के दौरान उसने यह तक कहा कि “मुझे यह तक नहीं बताया गया कि मुझे किस जुर्म में गिरफ्तार किया गया है।”
हालांकि, पुलिस का कहना है कि उसे स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह मामला दवा में घातक तत्व मिलने और बच्चों की मौत से जुड़ा है।


जहरीली कफ सिरप से 25 मासूमों की मौत

इस हादसे ने छिंदवाड़ा ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में मातम का माहौल बना दिया।
बीते सप्ताह कोल्ड्रिफ ब्रांड की कफ सिरप पीने के बाद जिले और आसपास के गांवों में 25 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।
जांच में पाया गया कि सिरप में घातक रासायनिक पदार्थ (डायथिलीन ग्लाइकोल) की मात्रा मानक से कई गुना अधिक थी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया और पूरे प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए।

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तमिलनाडु से जबलपुर और छिंदवाड़ा तक का रास्ता

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि श्रेसन फार्मा कंपनी का मुख्यालय चेन्नई (तमिलनाडु) में है।
यहां से दवा को जबलपुर के एक वितरण एजेंट के माध्यम से मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में भेजा गया था।
सवाल यह है कि छिंदवाड़ा जिले में ही इस सिरप की बड़ी खेप क्यों मंगाई गई, जबकि अन्य जिलों में इसकी आपूर्ति बेहद सीमित थी।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या स्थानीय स्तर पर किसी निजी वितरक या अस्पताल से मिलीभगत के तहत यह दवा पहुंचाई गई थी।


जांच के केंद्र में कंपनी की पंजीकरण और उत्पादन प्रक्रिया

छिंदवाड़ा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिमांड अवधि में पुलिस का ध्यान मुख्य रूप से कंपनी की कानूनी और उत्पादन संबंधी प्रक्रियाओं की जांच पर है।
रंगनाथन से यह जानकारी ली जा रही है कि —

  • कंपनी का पंजीकरण कब और किन साझेदारों के साथ हुआ,
  • निर्माण लाइसेंस किस श्रेणी में प्राप्त किया गया,
  • उत्पादन के दौरान गुणवत्ता जांच किस प्रयोगशाला से कराई गई,
  • और क्या किसी स्तर पर मानकों की अनदेखी या फर्जीवाड़ा हुआ।

सूत्रों के अनुसार, कंपनी के दस्तावेजों में कई विसंगतियां मिली हैं।
प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि उत्पादन के दौरान रासायनिक मिश्रण में घातक तत्वों का स्तर बढ़ गया, जिसके चलते दवा जहरीली हो गई।


“मामले की जड़ तक जाएंगे” — एसआईटी प्रमुख

एसआईटी प्रमुख ने मीडिया को बताया कि जांच का दायरा सिर्फ छिंदवाड़ा तक सीमित नहीं है।
यह देखा जा रहा है कि क्या श्रेसन फार्मा ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की आपूर्ति की थी।
यदि ऐसा पाया गया, तो जांच को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हम हर बिंदु पर जांच कर रहे हैं — लाइसेंस से लेकर वितरण तक, ताकि किसी भी स्तर पर जिम्मेदार व्यक्ति को छोड़ा न जाए।”


प्रशासन और सरकार की सख्त कार्रवाई

इस मामले के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों को निलंबित किया है और सभी दवा वितरण चैनलों की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “बच्चों की मौत एक असहनीय त्रासदी है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
प्रदेश में अब हर जिले में फार्मा कंपनियों के नमूनों की गुणवत्ता जांच का अभियान चलाया जा रहा है।


छिंदवाड़ा में अब भी गम का माहौल

घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी छिंदवाड़ा के गांवों में मातम पसरा है।
मृत बच्चों के परिजनों ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि दोषी कंपनी के खिलाफ हत्या के समान मामला दर्ज किया जाए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद अपराध की प्रकृति के अनुसार धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) सहित अन्य धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।


आने वाले दिनों में निर्णायक पूछताछ

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में रंगनाथन से कंपनी के अन्य निदेशकों, वितरकों और आपूर्तिकर्ताओं के संबंध में भी पूछताछ की जाएगी।
साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि क्या कंपनी ने गुणवत्ता प्रमाणन एजेंसी को फर्जी रिपोर्ट भेजी थी।
रिमांड की अवधि के भीतर जांच दल को इस प्रकरण की जड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।