- चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे (NH-3) पर देखने को मिला, जो बुधवार रात एक बार फिर से बंद हो गया
मंडी। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसका सबसे बड़ा असर चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे (NH-3) पर देखने को मिला, जो बुधवार रात एक बार फिर से बंद हो गया। इस बार हाईवे का नुकसान इतना गंभीर है कि निकट भविष्य में इसके बहाल होने की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है।
कैंची मोड़ के पास राजमार्ग पूरी तरह जमींदोज
बीती रात पंडोह डैम के पास कैंची मोड़ क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ। इसके चलते नेशनल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंसकर पूरी तरह से जमींदोज हो गया। अब इस स्थान पर पैदल चलने तक के लिए रास्ता नहीं बचा है। जबकि इससे पहले हाईवे बनाला क्षेत्र में पहाड़ से पत्थर गिरने की वजह से बंद था। वहां पर आज सड़क बहाली का काम शुरू होना था, लेकिन कैंची मोड़ के पास हुए इस बड़े धंसाव ने हालात और बिगाड़ दिए।
ट्रैफिक कटौला मार्ग की ओर मोड़ा गया
प्रशासन ने फिलहाल बड़े वाहनों को नौ मील के पास रोक दिया है, जबकि छोटे वाहनों को मंडी से कुल्लू वाया कटौला मार्ग से एक-एक घंटे के अंतराल पर निकाला जा रहा है। कुल्लू और मनाली से संपर्क बनाए रखने के लिए यही मार्ग शेष बचा है। हालांकि यह मार्ग भी कन्नौज और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अक्सर भूस्खलन के कारण बाधित हो जाता है।
2023 की आपदा की यादें ताजा
स्थानीय लोगों का कहना है कि कैंची मोड़ के पास हाईवे धंसने की यह स्थिति कोई पहली बार नहीं है। वर्ष 2023 की आपदा में भी यही दृश्य सामने आया था जब हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंसकर पंडोह डैम में समा गया था। उस समय इस मार्ग को दुरुस्त कर यातायात बहाल करने में पूरे आठ महीने का लंबा समय लग गया था। आज की स्थिति उससे भी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि अब यहां किसी पुराने मार्ग के सहारे वैकल्पिक सड़क बनाने की संभावना नहीं है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संकट
मनाली, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जैसे पर्यटन स्थलों के लिए चंडीगढ़-मनाली हाईवे जीवन रेखा माना जाता है। अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में हजारों सैलानी इन क्षेत्रों का रुख करते हैं। हाईवे के ठप होने से पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, सेब सीजन के चलते किसानों और बागवानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेब की ढुलाई बाधित होने से करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।
प्रशासन के सामने कड़ी चुनौती
वर्तमान परिस्थिति में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाईवे की बहाली और यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने की है। कैंची मोड़ के पास धंसी सड़क को दुरुस्त करने में महीनों लग सकते हैं। ऐसे में यदि तत्काल वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया तो कुल्लू-मनाली पूरी तरह कट सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी समाधान निकालना जरूरी है, अन्यथा हर साल इस तरह की स्थिति से जूझना पड़ेगा।