भोपाल में मछली परिवार की अवैध कोठी पर चला बुलडोज़र, 100 करोड़ की संपत्ति जमींदोज
भोपाल।
राजधानी भोपाल में लव जिहाद और ड्रग्स सप्लाई जैसे गंभीर मामलों में घिरे कुख्यात मछली परिवार पर जिला प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। गुरुवार को प्रशासन ने इस परिवार की शान कही जाने वाली करीब छह हजार वर्ग फीट में बनी आलीशान तीन मंजिला कोठी पर बुलडोज़र चला दिया। यह कोठी न केवल परिवार के रसूख का प्रतीक थी, बल्कि यहाँ से उनकी अवैध गतिविधियों का संचालन भी किया जाता था। प्रशासन ने पुलिस बल और नगर निगम के अमले की मौजूदगी में इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
कार्रवाई से पहले तनाव का माहौल
कार्रवाई शुरू होते ही इलाके में तनाव फैल गया। स्थानीय लोगों ने मछली परिवार के साथ मिलकर भारी हंगामा किया। इसके चलते पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। एहतियातन इलाके में सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन का बुलडोज़र जैसे ही कोठी के गेट पर पहुँचा, पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया।
सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन और नोटिस
मछली परिवार की इस कोठी पर प्रशासन की कार्रवाई पहले भी प्रस्तावित थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन के चलते इसे रोका गया था, जिसमें कहा गया है कि रिहायशी इलाकों में बिना पूर्व सूचना के ध्वस्तीकरण नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर प्रशासन ने परिवार को नोटिस देकर समय दिया था। इसके बावजूद मछली परिवार जमीन और निर्माण से जुड़े पुख्ता दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहा। यही कारण बना कि गुरुवार को कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

गोपनीय रणनीति और अचानक एक्शन
प्रशासन ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा। बुधवार देर रात तक अधिकारियों की बैठकों का दौर चलता रहा और रणनीति तैयार की गई। गुरुवार सुबह कार्रवाई शुरू करने से पहले अमले को कोकता पुलिस चौकी पर इकट्ठा किया गया। जैसे ही टीमें मौके पर पहुँचीं, बुलडोज़र चला दिया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान अफसरों के मोबाइल लगातार बजते रहे, क्योंकि हर कदम की जानकारी उच्च स्तर तक पहुँचाई जा रही थी।
कोठी थी रसूख और ताकत का प्रतीक
करीब तीन दशक पहले बनी यह कोठी सिर्फ एक घर नहीं बल्कि मछली परिवार के रसूख और दबदबे की पहचान थी। यहाँ नेताओं और अधिकारियों से लेकर शहर की नामचीन हस्तियों का आना-जाना रहता था। कोठी से ही रेस्टोरेंट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मदरसा, शादी हॉल, मैरिज गार्डन, फार्म हाउस और अन्य अवैध निर्माणों का संचालन होता था।
फार्म हाउस में बड़े स्तर की पार्टियाँ आयोजित होती थीं, जिनमें शहर की कई बड़ी हस्तियाँ शामिल होती थीं। परिवार का रसूख इतना था कि तीन-चार दशकों तक इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। लेकिन जब लव जिहाद और ड्रग्स सप्लाई के गंभीर आरोप सामने आए, तब से प्रशासन ने एक-एक कर इनकी अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।

अब तक की बड़ी कार्रवाइयाँ
मछली परिवार की अवैध संपत्तियों पर यह अकेली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी कई प्रॉपर्टी जमींदोज की जा चुकी हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आँकी गई। इनमें शामिल हैं –
- शकील अहमद पिता शरीफ अहमद का फार्म हाउस (अनंतपुरा कोकता)
- सारिक अहमद पिता शरीफ अहमद का 40,000 वर्ग फीट में फैला वेयर हाउस (अनंतपुरा कोकता)
- शकील अहमद का सुमन फार्म, जो शासकीय भूमि पर अवैध रूप से बनाया गया था
- इरशाद अहमद का कारखाना (शासकीय भूमि पर)
- अता-उल-रहमान का मदरसा (शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण)
- और अब, सारिक अहमद उर्फ मछली, सोहेल अहमद और शफीक अहमद की शासकीय जमीन पर बनी आलीशान तीन मंजिला कोठी।
रसूख का अंत
यह कार्रवाई केवल अवैध संपत्ति को जमींदोज करने की कार्यवाही नहीं थी, बल्कि तीन-चार दशकों से चली आ रही उस ताकत और रसूख का अंत था, जिसने शहर में भय और दबदबे का वातावरण बना रखा था। अब स्थिति यह है कि कभी सत्ता और प्रशासन के गलियारों तक पहुँच रखने वाला मछली परिवार अपनी जमींदोज हवेली को ढहते हुए देखता रह गया।

जनता की प्रतिक्रिया
कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की साँस ली। लोगों का कहना है कि यह परिवार लंबे समय से अवैध कब्जों और गैरकानूनी धंधों के जरिए क्षेत्र में आतंक का माहौल बनाए हुए था। प्रशासन की यह कार्रवाई कानून और न्याय के लिए एक मजबूत संदेश है कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अवैध कब्जों और गैरकानूनी गतिविधियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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