August 31, 2025 2:26 AM

तिरंगे की शान में डूबा अटारी बॉर्डर, 79वें स्वतंत्रता दिवस पर नहीं होगी मिठाइयों की मिठास

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तिरंगे की शान में डूबा अटारी बॉर्डर: 79वें स्वतंत्रता दिवस पर नहीं होगी मिठाइयों का आदान-प्रदान

अमृतसर/अटारी बॉर्डर। भारत-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक अटारी बॉर्डर पर आज 79वां स्वतंत्रता दिवस पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। हालांकि इस बार का जश्न कुछ खामोशियों के बीच है, क्योंकि परंपरा के विपरीत इस वर्ष भी भारत और पाकिस्तान के बीच मिठाइयों का आदान-प्रदान नहीं होगा। सीमा पर तिरंगे की चमक और देशभक्ति का जोश भले ही चरम पर है, लेकिन रिश्तों में आई खटास ने पड़ोसी देशों के बीच वर्षों पुरानी यह सौहार्द की परंपरा रोक दी है।


6 साल से टूटी मिठास

भारत और पाकिस्तान के बीच हर साल स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) पर मिठाइयों का आदान-प्रदान एक अनूठी परंपरा रही है। लेकिन फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद से हालात बिगड़ने लगे। उस हमले में 40 से अधिक भारतीय जवान शहीद हुए थे, जिसका जवाब भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक से दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के फैसले ने दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव बढ़ा दिया।

पिछले छह वर्षों में केवल कुछ चुनिंदा मौकों पर मिठाई का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन अधिकतर समय यह परंपरा टूटती रही। इस वर्ष पहलगांव में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीयों की शहादत और उसके बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने माहौल को और अधिक गंभीर बना दिया। यही वजह है कि 2025 में भी दोनों देशों ने मिठाइयों का आदान-प्रदान न करने का निर्णय लिया है।


गेट भी रहेंगे बंद, सीमित होगी रिट्रीट सेरेमनी

अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोजाना होने वाली रिट्रीट सेरेमनी में आमतौर पर दोनों देशों के सैनिक हाथ मिलाते हैं और गेट खोलकर औपचारिक मुलाकात करते हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद 12 मई से अब तक गेट नहीं खोले गए हैं। आज की रिट्रीट सेरेमनी भी इसी पैटर्न पर होगी—गेट बंद रहेंगे, सैनिक अपनी-अपनी सीमाओं में रहकर झंडा उतारेंगे और औपचारिक हाथ मिलाने का क्रम नहीं होगा।

बीएसएफ और पाक रेंजर्स, दोनों ने इस मामले में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर रखे हैं। सीमित संवाद और बढ़ी हुई सतर्कता के बीच समारोह संपन्न होगा।


तिरंगे में सजा अटारी बॉर्डर

तनावपूर्ण माहौल के बावजूद अटारी बॉर्डर पर स्वतंत्रता दिवस का उत्साह कम नहीं हुआ है। बीती रात यहां बने स्वर्ण जयंती द्वार को तिरंगे के रंगों—केसरी, सफेद और हरे—में रोशन किया गया। विशेष लाइटिंग के जरिए पूरी गैलरी को इस तरह सजाया गया कि दूर से देखने पर यह तिरंगे के सम्मान में डूबा नजर आए।

स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए यह दृश्य देशभक्ति की भावना को चरम पर ले जाने वाला है। अनुमान है कि आज यहां करीब 50 हजार से अधिक दर्शक पहुंच सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए बीएसएफ ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।


रिट्रीट में दिखेंगे खास करतब

हालांकि मिठाई का आदान-प्रदान और गेट खोलने की परंपरा इस बार नहीं निभाई जाएगी, लेकिन रिट्रीट सेरेमनी को खास बनाने के लिए बीएसएफ ने विशेष कार्यक्रम तैयार किए हैं। झंडा उतारने की रस्म के साथ-साथ जवानों द्वारा जांबाज करतब भी पेश किए जाएंगे, जिनमें ऊंची छलांग, तेज कदमताल, और जोश से भरे सलामी प्रदर्शन शामिल होंगे। इन करतबों का उद्देश्य देशवासियों में उत्साह जगाना और सीमा पर तैनात जवानों की बहादुरी को प्रदर्शित करना है।


सीमा पर जश्न, पर मन में कसक

जहां एक ओर अटारी बॉर्डर तिरंगे की रौनक और देशभक्ति के रंग में डूबा है, वहीं दूसरी ओर भारत-पाकिस्तान के बीच संवादहीनता और बढ़ते तनाव ने इस पर्व की मिठास कम कर दी है। बुजुर्ग सीमा निवासी बताते हैं कि कभी 14-15 अगस्त पर दोनों तरफ से सैनिक हंसते-गाते, हाथ मिलाते और मिठाई बांटते थे। यह दृश्य अब बीते दिनों की बात हो गया है।

अटारी बॉर्डर पर आज का दिन भले ही पूरे गौरव और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस खटास के बीच कहीं न कहीं उम्मीद भी है कि आने वाले वर्षों में रिश्तों की यह ठंडक खत्म हो और सीमाएं सिर्फ नक्शे तक सीमित रहें, दिलों तक नहीं।



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