4 जुलाई तक चलेगा देवी आराधना का विशेष पर्व, साधकों के लिए नौ दिन विशेष नियमों का महत्व

भोपाल।
सनातन धर्म में शक्ति उपासना की विशेष तिथियों में से एक आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ इस वर्ष 26 जून, बुधवार से हो रहा है, जो 4 जुलाई तक चलेगा। यह पर्व आम नवरात्रियों की तरह सार्वजनिक रूप से नहीं मनाया जाता, बल्कि इसे साधकों और तांत्रिकों के लिए अत्यंत गोपनीय और साधनात्मक स्वरूप में महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में कुल चार बार नवरात्रियां आती हैं — चैत्र, शारदीय (सामान्य), आषाढ़ और माघ (गुप्त नवरात्रि)। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि को बड़े स्तर पर सार्वजनिक रूप से पूजित किया जाता है, वहीं आषाढ़ और माघ की नवरात्रियां विशेष साधना और सिद्धियों के लिए जानी जाती हैं। यही कारण है कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को तांत्रिकों, योगियों और साधकों द्वारा आत्मिक शक्ति, सिद्धि, और देवी कृपा प्राप्ति के लिए बेहद फलदायक माना गया है।

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🌺 घटस्थापना का महत्व और साधना की शुरुआत

गुप्त नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। पहले दिन शुभ मुहूर्त में देवी का आवाहन कर कलश स्थापना की जाती है। साधक शुद्ध व्रत और नियमों के साथ दुर्गा के नौ रूपों की साधना में लीन हो जाते हैं। यह साधना तांत्रिक विधियों के साथ की जाती है, जिसमें विशेष मंत्र, यंत्र और स्तोत्रों का उच्चारण कर देवी की कृपा अर्जित की जाती है।

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🕉️ इन नियमों का विशेष रखें ध्यान

गुप्त नवरात्रि की साधना में सफलता के लिए संयम, शुद्धता और आस्था अत्यंत आवश्यक मानी गई है। इन नौ दिनों में कुछ विशेष बातों का पालन करना जरूरी है —

❌ मांस, मदिरा और तामसिक आहार से परहेज

गुप्त नवरात्रि में तामसिक भोजन जैसे मांस, लहसुन, प्याज और शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। ये साधना की शुद्धता को बाधित करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करते हैं।

🧼 स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें

देवी पूजन के लिए तन, मन और स्थान की पवित्रता जरूरी है। रोज स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ, सुव्यवस्थित और सुगंधित रखें। अपवित्र स्थान पर साधना करने से प्रभाव घटता है।

📿 शांत और एकांत स्थान का चयन करें

साधना के लिए एक ऐसा स्थान चुनें जहां शांति हो और व्यवधान न हो। बार-बार किसी का आना-जाना साधना की शक्ति को कमजोर कर सकता है।

🧘‍♀️ वाणी, व्यवहार और विचारों पर संयम

इस अवधि में क्रोध, कटुता, झूठ, अपमान और निंदा से बचें। मां दुर्गा की साधना में पवित्रता का बड़ा महत्व है। जितना हो सके विनम्र और शांत रहें।

🙏 देवी की मूर्ति और पूजन सामग्री को सम्मान दें

बिना स्नान किए देवी की मूर्ति, कलश या पूजन सामग्री को न छुएं। देवी से जुड़ी वस्तुओं का आदर करें। पूजा के समय संकल्प और श्रद्धा से कार्य करें।

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📴 पूजा के समय एकाग्रता बनाए रखें

पूजा करते समय मोबाइल, बातचीत या किसी अन्य कार्य से ध्यान भटकाना वर्जित है। एकाग्रता साधना की ऊर्जा को बनाए रखती है।

🔔 मंत्र और स्तोत्रों का पाठ करें

गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के बीज मंत्र, सप्तशती, चालीसा या स्तुति का नियमित पाठ करें। इससे न केवल साधना को बल मिलता है बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।


🌸 देवी कृपा का लाभ: क्यों है गुप्त नवरात्रि विशेष?

गुप्त नवरात्रि एक ऐसा साधना काल है, जिसमें नियमपूर्वक व्रत, मंत्र जाप और ध्यान करने से आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं। यह समय साधकों के लिए अपने भीतर छिपी शक्ति को जाग्रत करने का अवसर होता है। देवी की आराधना करने से रोग, दुख, दरिद्रता और भय से मुक्ति मिलती है, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और आत्मबल का संचार होता है।


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यदि आप इस गुप्त नवरात्रि में संकल्प और नियमों के साथ देवी की उपासना करते हैं, तो यह काल आपके लिए सर्वसिद्धि, रक्षा और कृपा का द्वार बन सकता है। संयम, श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए की गई साधना निश्चित ही मां दुर्गा की विशेष कृपा का पात्र बनाती है।



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