अमरनाथ यात्रा 2025 का समापन: एक महीने में 4.10 लाख श्रद्धालु, बारिश से समय से पहले खत्म
अमरनाथ यात्रा का इस वर्ष समापन शनिवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ, जब छड़ी मुबारक पवित्र गुफा मंदिर में पहुंची। हिमालय की ऊँचाई पर स्थित इस गुफा में महंत दीपेंद्र गिरि की अगुआई में सैकड़ों साधु और भक्त एकत्र हुए। विशेष पूजा-अर्चना के बाद साल के अंतिम दर्शन कराए गए, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला।

एक महीने में पूरी हुई यात्रा
इस बार अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2025 से शुरू हुई थी। यात्रा के पहले दिन सुबह बाबा बर्फानी की पहली आरती हुई और भक्तों के लिए गुफा के पट खोले गए। हालांकि, लगातार भारी बारिश और रास्तों के खराब होने के कारण यात्रा को तय समय से पहले ही 3 अगस्त को रोकना पड़ा। इसका मतलब यह हुआ कि इस बार यात्रा केवल लगभग एक महीने तक ही चल पाई।
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। लगभग 50,000 सीआरपीएफ जवानों को पूरे मार्ग पर तैनात किया गया था, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। इसके बावजूद 5 जुलाई को एक बड़ा सड़क हादसा हुआ, जिसमें यात्रियों को लेकर जा रहे काफिले की चार बसें आपस में टकरा गईं। यह हादसा रामबन जिले के चंदरकोट लंगर के पास हुआ, जब एक बस के ब्रेक फेल हो गए और चालक ने नियंत्रण खो दिया। इसमें करीब 36 यात्री घायल हुए।

श्रद्धालुओं की संख्या में कमी
इस वर्ष लगभग 4.10 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा अमरनाथ के दर्शन किए। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में कम है, जब 2024 में 5.10 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री पहुंचे थे।
अमरनाथ यात्रा की अवधि और श्रद्धालुओं की संख्या में वर्षों से बदलाव देखा जा रहा है।
- 2024: 52 दिन की यात्रा, 5.10 लाख श्रद्धालु
- 2023: 62 दिन की यात्रा, 4.50 लाख श्रद्धालु
- 2022: 43 दिन की यात्रा, 3 लाख श्रद्धालु (कोविड के बाद पहली बार)
- 2019: 46 दिन की यात्रा
- 2020-21: कोरोना महामारी के कारण यात्रा स्थगित
- 2012: अब तक का रिकॉर्ड, 6.35 लाख श्रद्धालु
प्राकृतिक चुनौतियां और यात्रा की अहमियत
अमरनाथ यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के लिए भी जानी जाती है। ऊंचाई, ठंडा मौसम, और दुर्गम पहाड़ी रास्ते इसे बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इस बार बारिश और भूस्खलन ने यात्रियों और प्रशासन, दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं।
इसके बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि बाबा बर्फानी के दर्शन जीवन को धन्य कर देते हैं। यात्रा के दौरान केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामूहिक लंगर, सेवा भाव और पर्वतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

इस साल का संदेश
2025 की यात्रा कम अवधि और कम श्रद्धालुओं के साथ भले ही समाप्त हुई हो, लेकिन इसकी आस्था, अनुशासन और सामूहिक भावना उतनी ही प्रबल रही। मौसम और भौगोलिक चुनौतियों ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि अमरनाथ यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और विश्वास की एक अनोखी परीक्षा है।
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