रक्षा साझेदारी मजबूत करने और रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश
डोभाल की रूस यात्रा: ट्रंप की टैरिफ धमकी के बीच तेल और एस-400 पर अहम चर्चा
नई दिल्ली/मॉस्को। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-रूस रणनीतिक संबंधों को मज़बूती देना, तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना, और एस-400 डील से जुड़ी तकनीकी व सामरिक जरूरतों पर चर्चा करना है। ट्रंप की ओर से भारत को कच्चे तेल पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद यह दौरा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

🇷🇺 यात्रा का उद्देश्य: रणनीतिक संबंधों की मजबूती
रूसी न्यूज़ एजेंसी ‘TASS’ के मुताबिक यह यात्रा पहले से ही निर्धारित थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-भारत संबंधों में ताजा तनाव, और रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति जैसे विषयों के कारण अब इसका भूराजनीतिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।
डोभाल इस दौरान:
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता करेंगे।
- रूस के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को विस्तार देने पर फोकस करेंगे।
💣 एस-400 मिसाइल डील: मुख्य एजेंडा में शामिल
भारत और रूस के बीच 2018 में 40,000 करोड़ रुपये की लागत से हुई एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम डील भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- अब तक तीन बैटरियां भारत को प्राप्त हो चुकी हैं, जिनकी देश के विभिन्न हिस्सों में तैनाती हो चुकी है।
- माना जा रहा है कि डोभाल बाकी दो बैटरियों की आपूर्ति की समय-सीमा, लॉजिस्टिक और मेंटेनेंस जैसे विषयों पर बातचीत करेंगे।
इस डील पर अमेरिका ने शुरू से ही आपत्ति जताई थी और CAATSA कानून के तहत प्रतिबंधों की धमकी भी दी थी। ऐसे में भारत की यह पहल रणनीतिक आत्मनिर्भरता का संकेत मानी जा रही है।

🛢️ कच्चा तेल खरीद पर अमेरिका की धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर आरोप लगाया था कि वह रूस से सस्ती दरों पर तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है।
“अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका उसे भारी टैरिफ की चपेट में लाएगा।”
इस चेतावनी के बाद भारत की कूटनीति के सामने तेल आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने और अमेरिका को संतुष्ट करने की दोहरी चुनौती है।
⚔️ अमेरिका की शर्तें, रूस का भरोसा
ट्रंप ने साथ ही रूस को भी चेताया कि यदि वह यूक्रेन में संघर्षविराम की घोषणा नहीं करता, तो अमेरिका उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा।
भारत के सामने अब यह दुविधा है कि वह:
- अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध और तकनीकी साझेदारी को नुकसान न पहुंचाए
- लेकिन साथ ही, रूस जैसे पुराने रणनीतिक सहयोगी से रक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की डोर भी न तोड़े
डोभाल की यह यात्रा दोनों महाशक्तियों के बीच संतुलन साधने का कूटनीतिक प्रयास कही जा सकती है।

🔍 सामरिक साझेदारी पर विशेष जोर
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने सामरिक रिश्ते रहे हैं। इस समय डोभाल की यात्रा:
- रक्षा उत्पादन में संयुक्त सहयोग
- मिसाइल तकनीक और रक्षा निर्यात
- साझा सैन्य अभ्यासों की योजना
- रणनीतिक खुफिया साझेदारी
जैसे अहम विषयों पर केंद्रित हो सकती है।
🧭 क्या है आगे का रास्ता?
इस यात्रा के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी महीने के अंत तक रूस जाएंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत रूस के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्क को लगातार बनाए रखना चाहता है, ताकि बदलते वैश्विक समीकरणों में अपने हितों की रक्षा कर सके।
🔚
डोभाल की रूस यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक दिशा तय करने वाला एक अहम पड़ाव है। अमेरिका की चेतावनियों और रूस के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच भारत को बहुत संतुलित, चतुर और आत्मनिर्भर कूटनीति अपनानी होगी।
यह दौरा भारत को यह सुनिश्चित करने का अवसर देता है कि वह तेल, टैरिफ, रक्षा और भू-राजनीतिक मामलों में अपने हितों की प्रभावी रक्षा कर सके।
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