भारत की जीडीपी पहली तिमाही में 7.8% की रफ्तार से बढ़ी, पांच तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। इस अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो कि पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार यह दर पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की 6.5 प्रतिशत वृद्धि से काफी बेहतर है।

आरबीआई के अनुमान से अधिक रही वृद्धि
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक निकले। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती, घरेलू मांग में सुधार और निवेश में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को गति दी है।
कृषि और विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, कृषि क्षेत्र में अप्रैल-जून के दौरान 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में दर्ज 1.5 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। बेहतर मानसून और उत्पादन में सुधार ने कृषि क्षेत्र को मजबूती दी।
विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी स्थिर बनी रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह दर 7.6 प्रतिशत थी। हालांकि वृद्धि मामूली है, लेकिन निरंतर सुधार से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की आर्थिक रफ्तार उल्लेखनीय रही है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वृद्धि दर चीन की तुलना में काफी अधिक रही। चीन की जीडीपी वृद्धि दर इसी अवधि में 5.2 प्रतिशत रही, जबकि भारत की 7.8 प्रतिशत। इससे भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश बना हुआ है।
पिछली तिमाहियों से तुलना
इससे पहले सबसे अधिक जीडीपी वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत जनवरी-मार्च 2024 तिमाही में दर्ज की गई थी। उसके बाद से अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती देखी गई थी, लेकिन चालू वित्त वर्ष की शुरुआत मजबूत रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रफ्तार बनी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार, आय और निवेश के अवसरों में और तेजी आएगी।
चुनौतियां भी बरकरार
हालांकि, अर्थव्यवस्था की इस मजबूती के बीच चुनौतियां भी सामने हैं। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, अमेरिका द्वारा भारी शुल्क लगाए जाने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होना, और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले महीनों में जीडीपी की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाती है और औद्योगिक उत्पादन को और गति मिलती है तो भारत वित्त वर्ष 2025-26 में 7 प्रतिशत से अधिक की औसत वृद्धि दर बनाए रख सकता है। यह न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देगा बल्कि रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करेगा।
स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!
- अमेरिकी टैरिफ संकट के बीच पीएम मोदी का एशिया दौरा: जापान यात्रा संपन्न कर चीन रवाना
- राधा अष्टमी 2025 : राधा रानी के प्रिय भोग और सुखी जीवन के उपाय
- एशिया कप हॉकी: चीन को हराने के बाद अब जापान से भिड़ेगी भारतीय टीम, हरमनप्रीत की अगुवाई में सुधार की होगी कसौटी
- टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री का दौरा: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को नई दिशा
- भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक समझौता: चंद्रयान-5 मिशन में इसरो और जाक्सा मिलकर करेंगे काम