राजीव शुक्ला बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष बने, रोजर बिन्नी ने 70 साल की उम्र में छोड़ा पद
राजीव शुक्ला बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष बने, रोजर बिन्नी ने 70 साल की उम्र में छोड़ा पद
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में बड़ा बदलाव हुआ है। बोर्ड के अध्यक्ष रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर रोजर बिन्नी ने नियमों के चलते पद छोड़ दिया है। उनकी जगह बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। अब वे तब तक यह जिम्मेदारी निभाएंगे, जब तक बोर्ड का नया अध्यक्ष चुना नहीं जाता।

रोजर बिन्नी का कार्यकाल और इस्तीफा
रोजर बिन्नी ने साल 2022 में सौरव गांगुली की जगह बीसीसीआई अध्यक्ष का पदभार संभाला था। उनके नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट के कई अहम फैसले लिए गए। लेकिन बीसीसीआई के संविधान के अनुसार कोई भी पदाधिकारी 70 साल की आयु पूरी होने के बाद पद पर नहीं रह सकता। इसी नियम के कारण बिन्नी को पद छोड़ना पड़ा।
वे 19 जुलाई 2024 को 70 वर्ष के हो गए थे। इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे जल्द ही पद छोड़ेंगे। अंततः अगस्त के अंत में उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

राजीव शुक्ला की नियुक्ति
बीसीसीआई ने उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया है। 65 वर्षीय शुक्ला राजनीति और क्रिकेट प्रशासन दोनों में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे साल 2020 से बीसीसीआई के उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं। शुक्ला इससे पहले आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन भी रह चुके हैं और बीसीसीआई की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्ला कुछ महीनों तक कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहेंगे। जब तक बीसीसीआई की एजीएम (वार्षिक आम सभा) नहीं होती और नया अध्यक्ष निर्वाचित नहीं होता, तब तक वे इस पद की जिम्मेदारी निभाएंगे।
बीसीसीआई में उम्र सीमा का नियम
बीसीसीआई के संविधान में यह प्रावधान है कि 70 साल की आयु पूरी करने के बाद कोई भी पदाधिकारी बोर्ड के किसी भी पद पर कार्यरत नहीं रह सकता। यही नियम प्रशासकों और चयनकर्ताओं पर भी लागू होता है। इस प्रावधान का उद्देश्य बोर्ड में नए नेतृत्व और ताजगी को मौका देना है।
रोजर बिन्नी इस नियम की वजह से पद छोड़ने वाले पहले बड़े पदाधिकारी नहीं हैं। इससे पहले भी कई वरिष्ठ प्रशासक इस सीमा के कारण पद से हटे हैं।
शुक्ला के सामने चुनौतियां
राजीव शुक्ला के सामने कार्यवाहक अध्यक्ष रहते हुए कई चुनौतियां होंगी। इनमें सबसे अहम आने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शेड्यूल का संचालन, टीम इंडिया की आगामी सीरीजों की तैयारियां और घरेलू क्रिकेट ढांचे को और मजबूत करना है। इसके अलावा आईपीएल 2025 की तैयारी भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि शुक्ला का प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि उन्हें इस पद पर प्रभावी बनाएगी। हालांकि, असली कसौटी तब होगी जब नए अध्यक्ष के चुनाव तक वे बोर्ड की एकजुटता बनाए रखें।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव
राजीव शुक्ला उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। क्रिकेट प्रशासन में उनकी सक्रियता 2000 के दशक से है। आईपीएल के शुरुआती दौर से लेकर अब तक वे अलग-अलग भूमिकाओं में बीसीसीआई से जुड़े रहे हैं। उनकी गिनती उन नेताओं में होती है, जो क्रिकेट और राजनीति दोनों क्षेत्रों में संतुलन साधने में माहिर हैं।
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