- मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा, व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को जापान के दो दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इस दौरान वे भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जो दोनों देशों की रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देगा। मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा, व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है।
भारत-जापान संबंधों का ऐतिहासिक आधार
भारत और जापान के बीच 2000 में वैश्विक साझेदारी की नींव पड़ी और 2014 में इसे विशेष रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया गया। दोनों देशों की नीतियां एक-दूसरे की पूरक हैं—भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और जापान की “स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत” (FOIP) पहल। दोनों देश क्वाड, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसे वैश्विक मंचों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
जापान भारत का सबसे बड़ा आधिकारिक विकास सहायता (ODA) दाता है और हिंद-प्रशांत महासागर पहल में अहम भूमिका निभाता है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना इसका बड़ा उदाहरण है, जिसके लिए जापान ने 300 अरब येन की सहायता दी।
हाल के वर्षों में संबंधों की गहराई
भारत-जापान संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।
- 2007 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारतीय संसद में “दो समुद्रों का संगम” भाषण दिया था, जिसने रिश्तों को नई दिशा दी।
- 2013 में जापानी सम्राट अकिहितो और महारानी मिचिको की भारत यात्रा ने सांस्कृतिक जुड़ाव को गहराया।
- 2014 में आबे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बने।
- 2022 में प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भारत में 5 ट्रिलियन येन (लगभग 42 बिलियन डॉलर) निवेश की घोषणा की।
- 2023 में किशिदा ने हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए 300 अरब येन की ओडीए सहायता दी।
- 2024 में मोदी और किशिदा ने इटली में जी7 शिखर सम्मेलन और वियनतियाने में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की।
- 2025 में क्वाड शिखर सम्मेलन और इशिबा की संवेदना कॉल ने विश्वास की गहराई को दर्शाया।
रक्षा सहयोग की मजबूती
भारत-जापान संबंधों का अहम पहलू रक्षा सहयोग है।
- 2008 में सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा हुई।
- 2015 में सूचना संरक्षण समझौता किया गया।
- 2020 में आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
- 2024 में यूनिकॉर्न नौसैनिक मस्तूल का सह-विकास शुरू हुआ।
नियमित सैन्य अभ्यास जैसे मालाबार, जिमेक्स और धर्म गार्जियन दोनों देशों के सामरिक सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं। 2024 में आर्थिक सुरक्षा वार्ता की शुरुआत ने इस सहयोग को नई दिशा दी।
व्यापार और निवेश संबंध
भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 22.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत से जापान को रसायन, वाहन और समुद्री भोजन निर्यात होता है, जबकि जापान से मशीनरी और इस्पात का आयात होता है। जापान 43.2 अरब डॉलर के एफडीआई के साथ भारत में पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है। लगभग 1,400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, वहीं 100 से अधिक भारतीय कंपनियां जापान में सक्रिय हैं।
सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध
भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक रिश्ते भी गहरे हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, कौशल विकास, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। बुद्ध धरोहरों से लेकर आधुनिक तकनीकी साझेदारी तक, दोनों देशों के रिश्तों में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
मोदी की यात्रा का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी की यह आठवीं जापान यात्रा होगी और प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ पहला शिखर सम्मेलन। इस यात्रा के दौरान दोनों देश रक्षा और सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, इनोवेशन और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर विस्तृत समीक्षा करेंगे। उम्मीद है कि इस यात्रा से डिजिटल सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता में नए आयाम जुड़ेंगे।
भारत-जापान साझेदारी न केवल दोनों देशों के विकास में योगदान करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।