August 30, 2025 2:01 PM

भिंड: भाजपा विधायक और जिलाधिकारी आमने-सामने, गुस्से में दो बार उठाया हाथ, बोला- “तू है चोर”

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भिंड में भाजपा विधायक और जिलाधिकारी में विवाद, हाथ उठाने तक पहुंचे हालात

भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और जिलाधिकारी संजीव श्रीवास्तव के बीच बुधवार को बड़ा विवाद हो गया। हालात इतने बिगड़े कि विधायक ने जिलाधिकारी से गाली-गलौज करते हुए उन्हें मारने के लिए दो बार हाथ तक उठा दिया। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्डों और प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभाली।

कैसे भड़के विधायक कुशवाह?

दरअसल, खाद की किल्लत और किसानों की समस्याओं को लेकर विधायक नरेंद्र कुशवाह किसानों के साथ जिलाधिकारी के बंगले पर धरना दे रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रशासन तुरंत समाधान करे। इस बीच, जिलाधिकारी संजीव श्रीवास्तव ने बाहर आकर धरना स्थल पर किसानों से मिलने से इंकार कर दिया और केवल दरवाजे के पास आकर बातचीत की। इस दौरान गुस्से से भरे विधायक ने जिलाधिकारी पर गालियां बरसाना शुरू कर दिया और दो बार उन्हें मारने के लिए हाथ भी उठाया।

“रेत की चोरी नहीं चलने दूंगा” बनाम “तू है सबसे बड़ा चोर”

विवाद के दौरान जिलाधिकारी संजीव श्रीवास्तव ने साफ कहा कि रेत की चोरी किसी भी कीमत पर नहीं चलने दी जाएगी। इस पर नाराज विधायक कुशवाह भड़क गए और गुस्से में कहा, “तू है सबसे बड़ा चोर।”

किसानों के समर्थन में विधायक

विधायक कुशवाह ने कहा कि जिले में खाद का संकट गहराता जा रहा है। किसानों को सरकारी वितरण प्रणाली से खाद नहीं मिल रहा, जबकि खुले बाजार में यह महंगे दामों पर आसानी से उपलब्ध है। इससे कालाबाजारी की आशंका गहरी हो गई है। उन्होंने प्रशासन पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

आयुक्त और मंत्री से की गई बात

विवाद के बाद विधायक ने फोन पर चंबल संभाग के आयुक्त मनोज खत्री से बातचीत की और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। कुशवाह ने आयुक्त को बताया कि खाद संकट को दूर करने के लिए कोई ठोस तैयारी प्रशासन ने नहीं की है। वहीं, इस घटनाक्रम की जानकारी लगते ही प्रदेश के मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी विधायक कुशवाह को फोन पर चर्चा कर शांत कराने का प्रयास किया।

घटना के राजनीतिक मायने

भाजपा विधायक और जिलाधिकारी के बीच इस तरह का विवाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े करता है। एक ओर किसान खाद संकट से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर विधायक और प्रशासनिक अधिकारी आपसी टकराव में उलझे दिखाई दे रहे हैं।



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