दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप: 10वां टेस्ट सफल, पहली बार आठ डमी सैटेलाइट छोड़े
टेक्सास। दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप का बहुप्रतीक्षित 10वां परीक्षण बुधवार 27 अगस्त को अमेरिका के टेक्सास स्थित बोका चिका लॉन्च पैड से किया गया। यह उड़ान पूरी तरह सफल रही और इसने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दिशा में एक नई उपलब्धि दर्ज की। इस टेस्ट की अवधि कुल 1 घंटा 6 मिनट रही, जिसमें सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया गया।
Splashdown confirmed! Congratulations to the entire SpaceX team on an exciting tenth flight test of Starship! pic.twitter.com/5sbSPBRJBP
— SpaceX (@SpaceX) August 27, 2025

पहली बार छोड़े गए आठ डमी स्टारलिंक सैटेलाइट
इस मिशन की सबसे खास उपलब्धि रही कि इसमें पहली बार आठ डमी स्टारलिंक सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े गए। ये वास्तविक सैटेलाइट नहीं थे, बल्कि इनके मॉडल या सिम्युलेटर थे, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया गया। परीक्षण का मकसद यह देखना था कि रॉकेट भविष्य में बड़े पैमाने पर वास्तविक सैटेलाइट को किस तरह सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कक्षा में स्थापित कर सकता है।

रीयूजेबल तकनीक पर केंद्रित प्रयोग
स्टारशिप को बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स और उसके संस्थापक इलॉन मस्क लंबे समय से अंतरिक्ष यातायात को सस्ता और आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही कारण है कि स्टारशिप को पूरी तरह से रीयूजेबल (दोबारा इस्तेमाल योग्य) बनाया गया है।
- यह वाहन 403 फीट ऊंचा है और इसमें दो हिस्से शामिल हैं –
- सुपर हेवी बूस्टर (निचला हिस्सा)
- स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा)
हिंद महासागर और अमेरिकी खाड़ी में की गई वॉटर लैंडिंग
इस परीक्षण के दौरान स्टारशिप के ऊपरी हिस्से की हिंद महासागर में नियंत्रित जल-अवतरण (वॉटर लैंडिंग) कराई गई, जबकि सुपर हेवी बूस्टर को लॉन्च साइट पर न लौटाकर अमेरिका की खाड़ी में उतारा गया। यह प्रयोग इसलिए किया गया ताकि कंपनी विभिन्न परिस्थितियों में बूस्टर और स्पेसक्राफ्ट के व्यवहार का अध्ययन कर सके और भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के लिए डेटा एकत्रित कर सके।

नई तकनीक और इंजन परीक्षण
स्टेज सेपरेशन के बाद बूस्टर ने नियंत्रित तरीके से दिशा बदली और बूस्टबैक बर्न किया। इसमें ईंधन बचाने की तकनीक का उपयोग किया गया, ताकि चढ़ाई के दौरान अधिक ईंधन का इस्तेमाल पेलोड ले जाने में हो सके।
लैंडिंग के समय भी एक खास तकनीक का परीक्षण किया गया। बूस्टर के तीन मुख्य इंजनों में से एक को जानबूझकर बंद कर दिया गया ताकि यह देखा जा सके कि बैकअप इंजन अंतिम चरण की लैंडिंग को सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकता है या नहीं। यह प्रयोग सफल रहा।
इसके अलावा, अंतरिक्ष में एक रैप्टर इंजन को दोबारा चालू करने का भी सफल परीक्षण किया गया।
पिछली विफलता से मिली सीख
यह सफलता स्पेसएक्स के लिए बेहद अहम रही, क्योंकि इससे पहले 29 जून को स्टारशिप के परीक्षण में बड़ी विफलता हुई थी। उस समय स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में विस्फोट हो गया था। यह टेस्ट जमीन पर रखे रॉकेट के इंजन चालू करके किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले उसकी सभी तकनीकी क्षमताओं की जांच की जा सके। लेकिन उस समय पूरा रॉकेट अचानक आग के गोले में तब्दील हो गया था।
अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में बड़ा कदम
स्पेसएक्स का यह 10वां टेस्ट न केवल तकनीकी दृष्टि से सफल रहा, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि भविष्य में यह रॉकेट मानवयुक्त मिशनों, बड़े उपग्रह प्रक्षेपण और यहां तक कि मंगल मिशन जैसे महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों के लिए भरोसेमंद साबित हो सकता है। इस मिशन से एकत्रित डेटा कंपनी को आने वाले वर्षों में और अधिक सुरक्षित व शक्तिशाली रॉकेट विकसित करने में मदद करेगा।
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