उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो को मिली मंजूरी | मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में जहां उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल परियोजना के डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की स्वीकृति दी गई, वहीं ऊर्जा, न्याय प्रशासन और पुलिस विवेचना प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगी।

🚇 उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल परियोजना
- मंत्रि-परिषद ने उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर बनाने का कार्य दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सौंपने की स्वीकृति दी।
- परामर्श शुल्क 9 लाख रुपए प्रति किलोमीटर (जीएसटी अलग से) तय किया गया है।
- प्रथम चरण में श्री महाकालेश्वर उज्जैन से लवकुश चौराहा इंदौर तक और दूसरे चरण में लवकुश चौराहा से पीथमपुर तक मेट्रो लाइन का विस्तार होगा।
📱 ई-विवेचना ऐप और टैबलेट खरीद
- प्रदेश में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) प्रोजेक्ट को मजबूत करने के लिए 25,000 टैबलेट खरीदे जाएंगे।
- इस पर 75 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
- इससे विवेचना अधिकारी मौके पर ही डिजिटल तरीके से केस से जुड़ी कार्रवाई कर सकेंगे।
- योजना की संशोधित लागत अब 177.87 करोड़ रुपए होगी।
- इससे पहले 1732 टैबलेट खरीदे जा चुके हैं।
⚖️ 610 नए पदों की स्वीकृति
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के सुचारू क्रियान्वयन और न्यायालयों में अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 610 नए पद सृजित किए गए।
- इनमें शामिल हैं:
- अतिरिक्त लोक अभियोजक – 185 पद
- अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी – 255 पद
- सहायक जिला अभियोजन अधिकारी – 100 पद
- सहायक कर्मचारी – 70 पद
- इन पदों पर 3 वर्षों में लगभग 60 करोड़ रुपए व्यय होगा।
🔌 विद्युत क्रय का निर्णय
- एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने 4000 मेगावाट की प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाओं से बिजली क्रय की स्वीकृति दी।
- चयनित तीन विकासकों से क्रमशः 800 मेगावाट, 1600 मेगावाट और 800 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी।
- साथ ही ग्रीनशू प्रावधान का उपयोग कर अतिरिक्त 800 मेगावाट बिजली भी खरीदी जाएगी।
☀️🌬 सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं
- 100 मेगावाट सौर ऊर्जा और 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना कैप्टिव मोड पर स्थापित करने की स्वीकृति मिली।
- इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली का उपयोग मध्यप्रदेश जल निगम की समूह ग्राम पेयजल योजनाओं में होगा।
- भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 6 माह का रिवॉल्विंग लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया जाएगा।
- वर्तमान में जल निगम 35 हजार से अधिक ग्रामों के 75 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध करा रहा है।
- इस योजना में अब तक 60,786 करोड़ रुपए की लागत से 147 योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है।
🔎
मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए फैसले प्रदेश में बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। उज्जैन से पीथमपुर मेट्रो परियोजना जहां यातायात और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लाएगी, वहीं ऊर्जा परियोजनाएं और ई-विवेचना ऐप न्याय और पुलिस प्रशासन को डिजिटल व सशक्त बनाने में सहायक होंगे।
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