भारत पर 50% ‘ट्रंप टैरिफ’ लागू, मोदी सरकार का जवाब — ईवी निर्यात से नई रणनीति
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव नए स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सामान पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है। भारतीय समयानुसार बुधवार, 27 अगस्त सुबह 9:31 बजे से यह टैरिफ लागू हो गया। इससे अमेरिका में भारतीय सामान पर कुल 50% ड्यूटी लगने लगी है।
अमेरिका का कहना है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच रहा है, इसलिए यह दंडात्मक टैरिफ लगाया गया है। वहीं भारत ने इसे आर्थिक दबाव मानने से इनकार करते हुए ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को 100 देशों में निर्यात करने का ऐलान कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मारुति सुजुकी के साथ इस पहल को हरी झंडी दी और साथ ही हाइब्रिड बैटरी उत्पादन की शुरुआत की।

किन उद्योगों पर पड़ेगा असर?
- ज्वेलरी सेक्टर – अमेरिका भारत का सबसे बड़ा मार्केट है, 50% टैरिफ से निर्यात घटेगा।
- टेक्सटाइल उद्योग – भारतीय कपड़े और गारमेंट्स अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे।
- ऑटो सेक्टर – अमेरिका में भारतीय वाहन और पार्ट्स की मांग घट सकती है।
- सीफूड इंडस्ट्री – एक्सपोर्ट घटने से तटीय राज्यों के मछुआरों पर सीधा असर।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ की वजह से इन क्षेत्रों में ऑर्डर कम होंगे, प्रोडक्शन घटेगा और नौकरियों पर संकट बढ़ सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
- अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 48.2 अरब डॉलर है।
- अतिरिक्त टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ 0.2% से 0.6% तक घट सकती है।
- निर्यात से होने वाली कमाई में सीधी कमी आएगी।
शेयर बाजार में भूचाल
ट्रंप टैरिफ की अधिसूचना के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
- सेंसेक्स – 849 अंक गिरकर 80,786.54 पर बंद हुआ।
- निफ्टी – 255 अंक फिसलकर 24,713.05 पर बंद हुआ।
निवेशकों को एक ही दिन में हजारों करोड़ का नुकसान हुआ।
मोदी-ट्रंप रिश्तों में खटास
जर्मन अखबार एफएजेड ने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को टैरिफ मुद्दे पर चार बार फोन किया, लेकिन मोदी ने कॉल रिसीव नहीं किए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को नई दिल्ली आने से रोक दिया है। पहले दोनों नेताओं के बीच अच्छे रिश्ते थे, लेकिन ट्रंप की आक्रामक ट्रेड पॉलिसी और भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने से हालात बिगड़ गए हैं।
👉 अमेरिका की सख्ती के बीच भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी अर्थव्यवस्था अब केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर नहीं है। यूरोप, एशिया और अफ्रीकी देशों में भारत अपने निर्यात के नए रास्ते तलाश रहा है।
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