सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी गठित, जानवरों से जुड़े आरोपों की होगी गहन जांच
वंतारा ने कहा- कानून और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी एसआईटी करेगी जांच
नई दिल्ली।
रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर पर लगे आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया है। जानवरों से दुव्र्यवहार और उनकी खरीद-फरोख्त में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह जांच वन्यजीव संरक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

वंतारा का बयान: “कानून और पारदर्शिता सर्वोपरि”
एसआईटी गठन के बाद वंतारा प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया। वंतारा ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं और जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि वंतारा की प्राथमिकता हमेशा से जानवरों का बचाव, संरक्षण और पुनर्वास रही है।
वंतारा ने अपने बयान में कहा –
“हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं। वंतारा पारदर्शिता, सहयोग और कानून के पालन के प्रति समर्पित है। हमारा मिशन जानवरों का बचाव और उनका पुनर्वास है। हम एसआईटी की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आगे भी पूरी गंभीरता से काम करेंगे।”
संगठन ने अपील की कि जांच निष्पक्ष और बिना किसी पूर्वाग्रह के की जाए ताकि जानवरों के हितों की रक्षा हो सके।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: 12 सितंबर तक रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय एसआईटी गठित की है। इस समिति का नेतृत्व जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर करेंगे। आदेश के अनुसार, एसआईटी वन्यजीव संरक्षण कानून, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों, पर्यावरणीय मानकों और जानवरों के कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच करेगी।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि एसआईटी को 12 सितंबर तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा।
आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि
वंतारा ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर पर आरोप हैं कि जानवरों की खरीद में गड़बड़ी की गई और उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। विभिन्न पर्यावरण संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाए थे। यही वजह रही कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने उच्च स्तरीय जांच को जरूरी माना।
यह जांच अब न केवल वंतारा की कार्यप्रणाली बल्कि देश में वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण से जुड़े मानकों की स्थिति पर भी प्रकाश डालेगी।
वंतारा की पहल और कामकाज
गौरतलब है कि वंतारा को रिलायंस फाउंडेशन ने स्थापित किया था। इसका उद्देश्य है –
- लुप्तप्राय और घायल जानवरों का बचाव
- उनका चिकित्सीय उपचार और पुनर्वास
- आधुनिक मानकों के अनुरूप संरक्षण केंद्र विकसित करना
- वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देना
वर्षों से वंतारा ने कई जानवरों को बचाकर पुनर्वास किया है और इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। हालांकि, हाल के आरोपों ने इसकी कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

आगे का रास्ता
एसआईटी की जांच इस पूरे विवाद का भविष्य तय करेगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो वंतारा को गंभीर कानूनी और नैतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, यदि जांच में संगठन की पारदर्शिता और ईमानदारी साबित होती है तो यह न केवल वंतारा की छवि को मजबूत करेगा बल्कि भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाएगा।
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