August 31, 2025 12:36 AM

कारोबारी लॉर्ड स्वराज पॉल का लंदन में निधन

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ब्रिटिश उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल का निधन, 94 वर्ष की आयु में लंदन में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली। भारतीय मूल के दिग्गज ब्रिटिश उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल (94 वर्ष) का गुरुवार शाम (स्थानीय समयानुसार) लंदन के एक अस्पताल में निधन हो गया। हाल ही में उन्हें स्वास्थ्यगत कारणों से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अपने परिजनों की मौजूदगी में अंतिम सांस ली।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉर्ड स्वराज पॉल के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “स्वराज पॉल जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूं। ब्रिटेन में उद्योग, परोपकार और जनसेवा में उनके योगदान तथा भारत के साथ उनके गहरे संबंधों के लिए उनका अटूट समर्थन सदैव याद किया जाएगा। उनके साथ हुई कई मुलाकातें हमेशा स्मरणीय रहेंगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।”

जालंधर से लंदन तक का सफर

18 फरवरी 1931 को पंजाब के जालंधर में जन्मे लॉर्ड स्वराज पॉल ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई वहीं से की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा और व्यवसायिक अवसरों की तलाश में विदेश गए। 1960 के दशक में वे अपनी छोटी बेटी अंबिका के कैंसर उपचार के लिए ब्रिटेन पहुंचे थे। लेकिन दुर्भाग्यवश चार वर्षीय बेटी का निधन हो गया। इस गहरे व्यक्तिगत दुख को उन्होंने समाजसेवा में बदल दिया और बेटी की स्मृति में अंबिका पॉल फाउंडेशन की स्थापना की।

उद्योग और परोपकार में अहम योगदान

लॉर्ड पॉल ब्रिटेन स्थित कैपारो ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक थे। यह समूह स्टील और इंजीनियरिंग सहित कई क्षेत्रों में सक्रिय रहा और ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे लंबे समय तक ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य रहे और भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे।

अंबिका पॉल फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इस संस्था ने दुनिया भर में बच्चों और युवाओं की भलाई के लिए लाखों डॉलर दान किए।

अरबपति उद्योगपति की पहचान

लॉर्ड स्वराज पॉल लगातार संडे टाइम्स रिच लिस्ट में शामिल होते रहे। वर्ष 2025 में उनकी संपत्ति का अनुमान लगभग 2 बिलियन पाउंड (GBP) लगाया गया था और वे ब्रिटेन के 81वें सबसे धनी व्यक्ति माने गए।

स्वराज पॉल के निधन से न केवल ब्रिटेन बल्कि भारत के उद्योग और समाजसेवा जगत में भी गहरा शून्य पैदा हो गया है।



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