August 30, 2025 2:18 PM

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 : आज रात 12 बजे होगा नंदलाल का आगमन, जानें व्रत विधि और महत्व

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: व्रत की विधि, पूजा मुहूर्त, नियम और महत्व जानें

भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज (16 अगस्त 2025) मनाई जा रही है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था।

क्यों रात में होती है कृष्ण जन्म पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रात के आठवें मुहूर्त में हुआ था। इस वर्ष यह मुहूर्त रात 12 बजे से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसी कारण मंदिरों में विशेष पूजा और झांकी सजाकर रात में जन्मोत्सव मनाया जाता है। मथुरा, वृंदावन, द्वारका, पुरी सहित देशभर के प्रमुख मंदिरों में आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म की आरती और अभिषेक किया जाएगा।

जन्माष्टमी व्रत की विधि

  • व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प से होती है।
  • भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं या केवल फलाहार करते हैं।
  • मध्यरात्रि को भगवान का पंचामृत स्नान, श्रृंगार, धूप-दीप और नैवेद्य से पूजन किया जाता है।
  • रात में कृष्ण जन्म के समय शंख, घंटा और नगाड़ों की ध्वनि के बीच “नंद के आनंद भयो” के साथ भगवान के बाल रूप की आरती होती है।
  • व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करके, पूजा और भोग अर्पण कर किया जाता है।

व्रत के नियम

  • व्रती को अन्न, अनाज और नमकयुक्त भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • दिनभर में केवल फल, दूध, दही, माखन, शहद, सूखे मेवे या फलाहार लिया जा सकता है।
  • रात में पूजन के बाद यदि आवश्यकता हो तो दूध का सेवन किया जा सकता है।
  • बुजुर्ग, बच्चे और रोगी अपनी क्षमता अनुसार व्रत कर सकते हैं।

जन्माष्टमी पर क्या करें, क्या न करें

  • घर में श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
  • तुलसी पत्र, माखन-मिश्री, पंचामृत और फल अवश्य अर्पित करें।
  • इस दिन गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम, या गोपाल सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • नकारात्मक सोच, क्रोध और दिखावे से दूर रहकर पूरे दिन मन को शुद्ध रखें।

जन्माष्टमी का महत्व

  • आध्यात्मिक शुद्धि : व्रत और पूजा से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है।
  • सुख-समृद्धि : ग्रंथों में इस व्रत को “जयंती व्रत” कहा गया है, जो परिवार को समृद्धि और शांति प्रदान करता है।
  • संकट निवारण : मान्यता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और हर कार्य में विजय प्राप्त होती है।
  • आध्यात्मिक शक्ति : उपवास और ध्यान से व्यक्ति में आत्मबल और संयम की वृद्धि होती है।

इस दिन विशेष रूप से करें ये कार्य

  • घर में दीपक जलाकर श्रीकृष्ण जन्म का उत्सव मनाएं।
  • छोटे बच्चों को श्रीकृष्ण के बालरूप में सजाकर झांकी निकाली जाती है, इसमें सहभागिता करना पुण्यकारी है।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और दान अवश्य करें।
  • मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन और झांकी अवश्य देखें।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह धर्म, भक्ति और नीति पर चलने की प्रेरणा देने वाला उत्सव है। भक्तजन उपवास, कीर्तन और रात्रि पूजन कर भगवान से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।


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