अलास्का में ट्रंप-पुतिन मुलाकात: यूक्रेन युद्धविराम और भारत पर टैरिफ पर बड़ा फैसला संभव
मास्को/वॉशिंगटन/एंकोरेज।
अमेरिका के अलास्का प्रांत की राजधानी एंकोरेज इन दिनों पूरी दुनिया की कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। यहां 15 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच छह साल बाद आमने-सामने होने जा रही उच्चस्तरीय शिखर वार्ता ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। यह बैठक ज्वाइंट बेस एलमेंडॉर्फ-रिचर्डसन के सैन्य परिसर में होगी, जिसे सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित स्थानों में गिना जाता है।
इस मुलाकात का महत्व सिर्फ अमेरिका-रूस संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके एजेंडे में रूस-यूक्रेन युद्धविराम, भारत पर संभावित टैरिफ, आर्कटिक सहयोग, परमाणु हथियार नियंत्रण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। यही वजह है कि इस वार्ता को न केवल कूटनीतिक विश्लेषक, बल्कि विश्वभर की सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और मीडिया भी बारीकी से देख रहे हैं।
यूक्रेन युद्धविराम की उम्मीदें
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले ढाई वर्षों से चल रहा युद्ध न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए चुनौती बन चुका है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, हजारों की जान जा चुकी है और ऊर्जा संकट ने यूरोप को हिला कर रख दिया है। ट्रंप ने इस बैठक से पहले खुद को एक “वैश्विक शांति निर्माता” के रूप में पेश करते हुए कहा है कि वह पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की दोनों को शांति वार्ता के लिए तैयार कर सकते हैं।
हालांकि, इस प्रारंभिक वार्ता में जेलेंस्की को शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर यूरोपीय देशों में कुछ असंतोष है, क्योंकि उनका मानना है कि युद्धविराम पर किसी भी चर्चा में यूक्रेन की मौजूदगी आवश्यक है। इसके बावजूद, पुतिन के इस संकेत ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि युद्ध की आंच को कम करने के लिए किसी प्रारंभिक समझौते की संभावना बन सकती है।

भारत पर टैरिफ का मुद्दा
इस बैठक में एक और अहम विषय भारत पर संभावित 25% टैरिफ लगाने का अमेरिकी प्रस्ताव भी हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि भारत के साथ व्यापार घाटे को कम करने के लिए आयात शुल्क बढ़ाना जरूरी है, जबकि रूस इस मुद्दे पर अप्रत्यक्ष रूप से भारत के समर्थन में खड़ा हो सकता है, क्योंकि भारत रूस का एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है।
अगर यह टैरिफ लागू होता है तो इसका असर भारतीय निर्यात, खासकर स्टील, एल्यूमीनियम और फार्मास्यूटिकल्स पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन, ट्रंप को इस दिशा में नरमी बरतने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि भारत दोनों देशों के लिए ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यूरोपीय चिंताएं और अमेरिकी जनमत
बैठक से पहले प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि आधे से ज्यादा अमेरिकी नागरिक ट्रंप की युद्ध और विदेश नीति संबंधी फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा नहीं करते। यूरोपीय नेताओं को भी आशंका है कि बंद कमरे की बातचीत में पुतिन, ट्रंप पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना सकते हैं।
यूरोप पहले ही यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में अगर ट्रंप-पुतिन की वार्ता किसी ठोस शांति समझौते की ओर नहीं बढ़ती, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

परमाणु हथियार नियंत्रण और आर्कटिक सहयोग
पुतिन ने ट्रंप की कोशिशों को “ईमानदार और सक्रिय” बताते हुए यह संकेत दिया है कि परमाणु हथियारों के नियंत्रण पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका और रूस, दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार के मालिक हैं, और इनके बीच किसी भी प्रकार का हथियार नियंत्रण समझौता वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
इसके साथ ही, आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग का मुद्दा भी एजेंडे में है। जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक में बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे नए नौवहन मार्ग खुल रहे हैं और खनिज संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है। इस क्षेत्र में चीन भी सक्रियता बढ़ा रहा है, जिससे अमेरिका और रूस दोनों चिंतित हैं।
अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम
इस बैठक को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम अभूतपूर्व स्तर पर किए गए हैं। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और रूसी सुरक्षा बल “बॉडी-फॉर-बॉडी” तैनाती के तहत काम कर रहे हैं। पूरे एंकोरेज शहर को उच्च सुरक्षा क्षेत्र घोषित किया गया है, हवाई और समुद्री निगरानी कड़ी कर दी गई है, और स्थानीय नागरिकों को बैठक स्थल से दूर रहने की सलाह दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और संभावित परिणाम
अगर इस बैठक से कोई सकारात्मक नतीजा निकलता है, तो यह न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा बदल सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, रक्षा समझौतों, व्यापार नीतियों और कूटनीतिक समीकरणों पर भी असर डालेगा। भारत के लिए भी यह बैठक अहम है, क्योंकि टैरिफ पर फैसला सीधे उसके व्यापार और आर्थिक हितों को प्रभावित करेगा।
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