August 31, 2025 2:50 AM

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से मचैल माता यात्रा में भारी तबाही, 38 की मौत, 200 से अधिक लापता

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जम्मू-कश्मीर किश्तवाड़ में बादल फटा: 38 की मौत, 200 से अधिक लापता, मचैल माता यात्रा में मची तबाही

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के पड्डर सब-डिवीजन के चशोटी गांव में गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे बादल फटने की भीषण घटना हुई, जिसने मचैल माता यात्रा के पहले पड़ाव को तबाही के मंजर में बदल दिया। तेज बारिश के बीच पहाड़ों से अचानक भारी पानी और मलबा उतर आया, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं, दुकानों, टेंट और बसों को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे का समय और परिस्थितियां

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा में शामिल होने के लिए चशोटी गांव में जुटे थे। यह स्थान यात्रा की शुरुआती मंज़िल है, जहां से पैदल मार्ग की शुरुआत होती है। बादल फटने की जगह और श्रद्धालुओं का कैंप एक ही क्षेत्र में होने के कारण तबाही का असर कई गुना बढ़ गया। लंगर, अस्थायी दुकानें और वाहन कुछ ही मिनटों में बह गए।

जनहानि और लापता लोग

अभी तक प्रशासन ने 38 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 200 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव कार्य में जुटी टीमों ने 65 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। हादसे में घायल हुए करीब 100 लोगों में से 37 की हालत गंभीर है और उन्हें जिला अस्पताल किश्तवाड़ में भर्ती कराया गया है। बाकी घायलों का इलाज पाडर के उप-जिला अस्पताल में चल रहा है। मृतकों में दो CISF जवान भी शामिल हैं।

मचैल माता यात्रा का महत्व

हर साल अगस्त में आयोजित होने वाली मचैल माता यात्रा जम्मू से शुरू होकर किश्तवाड़ तक करीब 210 किलोमीटर लंबी होती है। इसमें पद्दर से चशोटी तक 19.5 किलोमीटर सड़क मार्ग है, जिसके बाद श्रद्धालुओं को 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। इस साल यह यात्रा 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चल रही है और इसमें देशभर से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

राहत और बचाव अभियान

सेना, पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। सेना के जम्मू स्थित जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री, चिकित्सा दल और बचाव उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं। पानी और मलबा हटाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश जारी है।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान होने वाली ‘ऐट होम’ चाय पार्टी और सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस त्रासदी पर शोक जताया और कहा कि राहत व बचाव कार्य में तेजी लानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

स्थानीय लोगों की व्यथा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतनी भीषण तबाही नहीं देखी। गांव के कई हिस्से पूरी तरह मलबे में दब गए हैं। सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनके सभी सदस्य लापता हैं।

आगे की चुनौतियां

भारी बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधाएं आ रही हैं। नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने से खतरा अभी टला नहीं है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी तंत्र की जरूरत को उजागर किया है।


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