राहुल गांधी की सुरक्षा पर पुणे कोर्ट में याचिका, सावरकर टिप्पणी विवाद में नया मोड़
पुणे की विशेष सांसद-विधायक अदालत में कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विनायक दामोदर सावरकर पर टिप्पणी को लेकर चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में एक नई कानूनी पहल हुई है। बुधवार को अदालत ने गांधी के वकील की ओर से दाखिल एक याचिका को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है, जब मामले की सुनवाई पहले से ही राजनीतिक और ऐतिहासिक संवेदनशीलता से घिरी हुई है।

मामले की पृष्ठभूमि
मार्च 2023 में लंदन में एक भाषण के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया था कि वीडी सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा था कि उन्होंने और उनके पांच-छह साथियों ने एक बार एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें इसमें आनंद महसूस हुआ था। सावरकर के पोते सत्यकी सावरकर ने इस बयान को पूरी तरह झूठा बताते हुए गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया। सत्यकी का कहना है कि ऐसी कोई घटना कभी घटित नहीं हुई और न ही सावरकर ने किसी भी पुस्तक में इस तरह का उल्लेख किया।
याचिका में सुरक्षा की चिंता
राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने अदालत में दायर याचिका में कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल, सावरकर टिप्पणी विवाद, और हाल के राजनीतिक टकरावों को देखते हुए गांधी की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका है। याचिका में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि भाजपा नेता आरएन बिट्टू ने गांधी को “आतंकवादी” कहकर संबोधित किया, वहीं भाजपा नेता तरविंदर मारवाह ने खुली धमकी देते हुए कहा कि गांधी को “अच्छा व्यवहार करना चाहिए, वरना उनका भी अपनी दादी जैसा ही हश्र होगा।”
पवार ने आगे यह भी तर्क दिया कि मामले के शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर का संबंध सावरकर और गोडसे परिवार से है, जिनकी विचारधारा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि हिंसा और संविधान विरोधी गतिविधियों से जुड़ी रही है। याचिका में कहा गया कि इस कारण से राजनीतिक विरोधियों और विशेष विचारधारा के अनुयायियों से गांधी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
महात्मा गांधी की हत्या का संदर्भ
याचिका में ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए कहा गया कि महात्मा गांधी की हत्या कोई आवेगपूर्ण कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी, जो एक विशिष्ट विचारधारा पर आधारित थी। इस विचारधारा के तहत एक निहत्थे व्यक्ति के खिलाफ जानबूझकर हिंसा की गई। राहुल गांधी के वकील का कहना है कि इतिहास को खुद को दोहराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
हालिया घटनाएं और राजनीतिक पृष्ठभूमि
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राहुल गांधी ने हाल ही में नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और “चुनावी धोखाधड़ी” के सबूत पेश किए। इसके बाद संसद में “वोट चोर सरकार” के नारे लगाते हुए उन्होंने धरना दिया। हिंदुत्व के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गांधी के बीच हुई तीखी बहस का भी हवाला याचिका में दिया गया, यह तर्क देते हुए कि इस सबके चलते गांधी के खिलाफ वैचारिक और व्यक्तिगत शत्रुता बढ़ गई है।
जमानत और कानूनी स्थिति
राहुल गांधी को इस मानहानि मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, वकील का कहना है कि यह संभावना नकारा नहीं जा सकती कि सावरकर की विचारधारा से प्रभावित या गोडसे जैसे चरमपंथी सोच रखने वाले लोग गांधी के जीवन के लिए खतरा पैदा करें।
शिकायतकर्ता की प्रतिक्रिया
इस याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्यकी सावरकर ने इसे “तुच्छ” करार दिया और आरोप लगाया कि गांधी की ओर से यह कदम मुकदमे में देरी करने की रणनीति है। उनका कहना है कि इस आवेदन में जो बातें उठाई गई हैं, उनका वर्तमान मानहानि मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है।
राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर टिप्पणी मामले में यह नया मोड़ न केवल कानूनी दृष्टि से बल्कि राजनीतिक माहौल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सुरक्षा को लेकर उठी आशंकाएं और ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र इस मामले को और संवेदनशील बना रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत में इस याचिका पर होने वाली सुनवाई तय करेगी कि गांधी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे या नहीं, जबकि मानहानि मामले की कार्यवाही अपनी अलग दिशा में जारी रहेगी।
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