अरब सागर में भारत और पाकिस्तान का नौसैनिक युद्ध अभ्यास, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार एक साथ अभ्यास
नई दिल्ली।
अरब सागर में इस समय एक दिलचस्प संयोग देखने को मिल रहा है—भारत और पाकिस्तान, दोनों की नौसेनाएं सोमवार से अपने-अपने समुद्री इलाकों में युद्ध अभ्यास कर रही हैं। हालांकि ये अभ्यास अलग-अलग और अपनी-अपनी समुद्री सीमाओं में हो रहे हैं, लेकिन समय लगभग एक ही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का यह अभ्यास 11-12 अगस्त तक चलेगा।

अभ्यास का स्थान और दूरी
भारतीय नौसेना का युद्धाभ्यास गुजरात के पोरबंदर और ओखा तटीय इलाकों में हो रहा है। वहीं, पाकिस्तान का अभ्यास इसी क्षेत्र से करीब 60 नॉटिकल मील (लगभग 111 किलोमीटर) की दूरी पर उसके समुद्री क्षेत्र में होगा। दोनों देशों ने इस अभ्यास को लेकर ‘नोटिस टू एयरमैन’ (NOTAM) जारी कर दिया है, ताकि समुद्री और हवाई मार्ग में आवश्यक एहतियात बरती जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार
यह स्थिति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 7 मई को हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान अपनी-अपनी सीमाओं में एक ही समय पर नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन किया था, जिसने पाकिस्तान सहित क्षेत्र के कई देशों का ध्यान आकर्षित किया था।
कौन से युद्धपोत होंगे शामिल, जानकारी गोपनीय
अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय और पाकिस्तानी नौसेनाओं के कौन-कौन से युद्धपोत या हथियार प्रणाली इन अभ्यासों में भाग ले रही हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि यह जानकारी रणनीतिक कारणों से गोपनीय रखी गई है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि भारतीय नौसेना अपने उन्नत युद्धपोतों, निगरानी विमानों और पनडुब्बी रोधी प्रणालियों का परीक्षण कर सकती है।

रणनीतिक महत्व
अरब सागर में यह अभ्यास केवल तकनीकी और सामरिक तैयारी का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी है। भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों के लिए अरब सागर एक महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है, जहां से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग गुजरते हैं।
भारत के लिए यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और युद्धक क्षमता को मजबूत करने का अवसर है, वहीं पाकिस्तान भी अपने नौसैनिक बल की तत्परता का संदेश दे रहा है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और सतर्कता
दोनों देशों के अभ्यास के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन और आपसी दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अभ्यास के समय नौसैनिक बल विशेष सतर्कता बरतेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अनजानी टकराव या गलतफहमी से बचा जा सके।
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