पीएम मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति की बातचीत: व्यापार, डिफेंस और अमेरिकी टैरिफ पर चर्चा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के बीच गुरुवार को टेलीफोन पर एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति जताई। यह संवाद ऐसे समय पर हुआ है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और अमेरिका द्वारा भारत और ब्राजील पर टैरिफ बढ़ाए जाने से व्यापारिक संबंधों में खिंचाव आया है।

पिछली मुलाकात का विस्तार और भविष्य की दिशा तय
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला ने जुलाई में हुई ब्राज़ील यात्रा की चर्चा की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, कृषि और तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर बातचीत हुई थी। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में हुए समझौतों को गति देने पर ज़ोर दिया और 2030 तक व्यापार को 20 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा।
वर्तमान में भारत और ब्राज़ील के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 12 अरब डॉलर के आसपास है। दोनों देशों की मंशा है कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा दो गुना हो जाए। ब्राज़ील ने इस उद्देश्य के लिए भारत के साथ अपने डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म और मर्कोसुर व्यापार समूह के साथ व्यापार समझौते के विस्तार पर भी बातचीत की।
ट्रम्प से बातचीत ठुकराकर मोदी को दी प्राथमिकता
दिलचस्प बात यह रही कि इस बातचीत से ठीक एक दिन पहले ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बात करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे टैरिफ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ट्रम्प से बात नहीं करेंगे। इसके विपरीत, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे नेताओं से बातचीत को अधिक उपयोगी बताया।
यह रुख बताता है कि ब्राज़ील वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों में भारत को एक प्रमुख सहयोगी के रूप में देख रहा है। यह घटनाक्रम भारत की वैश्विक भूमिका को और अधिक सशक्त करने वाला माना जा रहा है।

अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न तनाव
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत और ब्राज़ील पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। भारत पर यह टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया, जबकि ब्राज़ील को यह सज़ा वहां के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रही न्यायिक कार्रवाई के चलते दी गई। अमेरिका को संदेह है कि ब्राज़ील में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ साजिश हुई थी।
इस टैरिफ की वजह से भारत और अमेरिका के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक मतभेद और बढ़ सकते हैं। भारत ने इस मामले में अब तक संयम बरता है और आधिकारिक बयान में अमेरिका या टैरिफ का ज़िक्र नहीं किया है। लेकिन रणनीतिक रूप से भारत अब ब्राज़ील, इज़राइल और अन्य साझेदार देशों के साथ गठजोड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नेतन्याहू ने भारत को बताया “एशिया का खास देश”
भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के बीच एक अप्रत्याशित समर्थन इज़राइल से भी मिला है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को “एशिया में खास देश” बताते हुए ट्रम्प के रवैये के विरुद्ध भारत का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को समझना चाहिए कि भारत एक मजबूत और रणनीतिक साझेदार है।
नेतन्याहू ने भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग की भी सराहना की और खास तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ज़िक्र किया, जिसमें भारत ने इज़राइली सैन्य उपकरणों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था।

ऑपरेशन सिंदूर में इज़राइली तकनीक का उपयोग
यह ऑपरेशन मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था, जिसमें भारत ने इज़राइल निर्मित ‘हार्पी’ और ‘स्काईस्ट्राइकर’ जैसे आधुनिक सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम और चीनी रडार प्रणाली को निशाना बनाया था। नेतन्याहू ने कहा कि इस ऑपरेशन में इज़राइली तकनीक की सफलता भारत-इज़राइल संबंधों की मजबूती का प्रतीक है।
ब्राज़ील और भारत के बीच यह उच्च स्तरीय वार्ता सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों को ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में एक नई धुरी के उभरने की ओर संकेत करती है। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की आर्थिक दबाव नीति के बीच भारत का बढ़ता वैश्विक समर्थन यह साबित करता है कि वह अब एक परिपक्व और आत्मनिर्भर वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहा है।
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