August 30, 2025 11:16 PM

कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा के दौरान 3 दिन में 7 श्रद्धालुओं की मौत: आयोजन पर उठे सवाल, पं. प्रदीप मिश्रा पर कार्रवाई की मांग

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कुबेरेश्वर धाम में भगदड़ और अव्यवस्था से 7 श्रद्धालुओं की मौत, न्यायिक जांच के आदेश

सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में कुबेरेश्वर धाम में आयोजित कांवड़ यात्रा के दौरान तीन दिनों में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। यह त्रासदी धार्मिक आयोजन के कुप्रबंधन और अत्यधिक भीड़ के चलते हुई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और आयोजकों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरी घटना ने राजनीतिक गलियारों से लेकर मानव अधिकार संगठनों तक को सक्रिय कर दिया है।

11 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा, लेकिन नहीं थी पर्याप्त व्यवस्थाएं

यह यात्रा सीहोर जिले की सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक निकाली गई थी, जिसकी दूरी लगभग 11 किलोमीटर है। इस यात्रा का आयोजन पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा किया गया था, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन के पहले ही दिन, मंगलवार को रुद्राक्ष वितरण के समय जबरदस्त भीड़ जमा हो गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई समुचित योजना नजर नहीं आई, जिससे अफरातफरी और भगदड़ की स्थिति बन गई।

भगदड़ के कारण दो महिलाओं की मौत हो गई। इसके बाद बुधवार को विभिन्न कारणों से तीन और श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। गुरुवार को भी दो और लोगों ने दम तोड़ दिया। इस तरह कुल सात श्रद्धालुओं की असमय मृत्यु हो चुकी है।

मृतकों की पहचान: उत्तर प्रदेश और दिल्ली के श्रद्धालु शामिल

गुरुवार को जिन दो लोगों की मौत हुई, उनमें एक गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी 22 वर्षीय उपेंद्र गुप्ता पुत्र प्रेम गुप्ता था, जो अचानक गिर गया और जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। दूसरा मृतक 40 वर्षीय अनिल पुत्र महावीर, निवासी खेड़ा कला, दिल्ली था, जिसकी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल लाया गया, जहां उसे मृत घोषित किया गया। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है।

विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने उठाए सवाल

इस त्रासदी के बाद भाजपा की वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले ने सीधे पं. प्रदीप मिश्रा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में भीड़ का सही प्रबंधन नहीं किया जा रहा है और रुद्राक्ष वितरण जैसे कार्यों को तत्काल बंद किया जाना चाहिए।

वहीं राज्य के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए न्यायिक जांच की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की मौत बेहद दुखद है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

इस मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव कुमार टंडन ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेजकर पूछा है कि —

  • आयोजन के लिए भीड़ प्रबंधन की क्या तैयारी थी?
  • घायलों को इलाज की कैसी सुविधा दी गई?
  • मृतकों के परिजनों को क्या आर्थिक सहायता दी गई?

आयोग ने इन सभी बिंदुओं पर 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोजन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या का सही अनुमान और उसके अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है। न तो भीड़ नियंत्रण की तैयारी दिखी और न ही किसी आपात स्थिति के लिए मेडिकल इमरजेंसी की पर्याप्त व्यवस्था।

कई श्रद्धालु बिना भोजन, पानी और छाया के खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े रहे। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की हालत और भी चिंताजनक रही। भगदड़ के दौरान जिन महिलाओं की मौत हुई, उन्हें तुरंत प्राथमिक चिकित्सा नहीं मिल सकी, जिससे स्थिति और भी भयावह बन गई।

प्रशासन और आयोजकों की जिम्मेदारी तय हो

यह कोई पहली बार नहीं है जब धार्मिक आयोजन में जानें गई हों। लेकिन हर बार प्रशासनिक चूक और आयोजनकर्ताओं की लापरवाही के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस बार जब मामला मानव अधिकार आयोग और न्यायिक जांच तक पहुंच चुका है, तो यह उम्मीद की जा सकती है कि दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

कुबेरेश्वर धाम में हुई यह त्रासदी केवल एक धार्मिक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता का परिणाम है। सात श्रद्धालुओं की मौत किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि मानव निर्मित चूक है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि समय रहते पर्याप्त व्यवस्थाएं की जातीं और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी गंभीरता से ली जाती, तो शायद ये जानें बचाई जा सकती थीं।



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