August 30, 2025 11:48 PM

कजरी तीज 2025: नीमड़ी पूजन से लेकर व्रत विधि तक जानिए इस पावन पर्व की परंपराएं और आध्यात्मिक महत्व

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कजरी तीज 2025: जानिए नीमड़ी पूजन का महत्व, व्रत विधि और पौराणिक मान्यताएं

नई दिल्ली। उत्तर भारत में सावन के महीने की अंतिम तीज ‘कजरी तीज’ को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है। यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जो अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य, और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन व्रत रखती हैं। जहां सावन की हरियाली और झूले इस पर्व की रंगत बढ़ाते हैं, वहीं ‘नीमड़ी पूजन’ इसकी सबसे खास और आध्यात्मिक परंपरा मानी जाती है।


🌿 कजरी तीज और नीमड़ी पूजन: परंपरा का सुंदर संगम

कजरी तीज न सिर्फ एक धार्मिक त्योहार है, बल्कि यह प्रकृति, स्त्री शक्ति और सामूहिक उल्लास का उत्सव भी है। इस दिन महिलाएं नीम की डाली या पेड़ की पूजा करती हैं जिसे ‘नीमड़ी माता’ के रूप में देवी का स्वरूप माना जाता है।
नीम का वृक्ष शास्त्रों में रोगनाशक और वायुमंडल को शुद्ध करने वाला माना गया है, और यही कारण है कि इसकी पूजा को शरीर, मन और पर्यावरण की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।


🧘‍♀️ कजरी तीज का महत्व: सौभाग्य और संतान सुख का पर्व

  • यह पर्व हरियाली तीज के लगभग 15 दिन बाद आता है।
  • खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
  • महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और रात को कजरी माता की कथा सुनती हैं।
  • व्रत रखने का उद्देश्य पति की लंबी उम्र, घर की सुख-शांति और संतान प्राप्ति की कामना करना होता है।

🪔 नीमड़ी पूजन की विधि: प्रकृति को देवी रूप में वंदन

नीमड़ी पूजन में महिलाएं नीम की टहनी को एक स्थान पर गाड़कर या किसी पात्र में स्थापित कर उसकी देवी स्वरूप में पूजा करती हैं।
पूजन सामग्री में शामिल होते हैं:

  • सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, रोली, कंघी और हल्दी जैसी सुहाग की चीजें
  • नीम की पत्तियों पर मिट्टी से बनी देवी की प्रतिमा रखकर पूजा करना
  • महिलाओं द्वारा पारंपरिक कजरी गीतों का गायन

इस पूजन से महिलाओं को माना जाता है अखंड सौभाग्य, सकारात्मक ऊर्जा और संतान सुख की प्राप्ति होती है।


📜 कजरी व्रत की संपूर्ण विधि

  1. सुबह स्नान के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं।
  2. पूरा दिन निर्जल उपवास रखती हैं।
  3. शाम को नीमड़ी पूजन किया जाता है।
  4. कजरी माता की कथा सुनी जाती है, जिसमें ब्राह्मणी की आस्था और परीक्षा की कहानी होती है।
  5. गुड़-चावल का भोग अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है।

🌸 नीमड़ी पूजन की मान्यता

  • नीम में दुर्गा माता का वास माना जाता है।
  • इसे पूजने से स्त्रियों को दीर्घायु पति, संतान सुख और गृह कल्याण का वरदान मिलता है।
  • नीम के पेड़ के नीचे झूला झूलना, गीत गाना और सामूहिक पूजन करना ग्रामीण क्षेत्रों की खास परंपरा है।

कजरी तीज पर करें ये विशेष उपाय

1. नीम की टहनी पर चढ़ाएं सुहाग की सामग्री

  • चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, कंघी चढ़ाने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।

2. गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से नीम की डाली का अभिषेक

  • इससे वातावरण में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

3. तालाब, कुएं या नदी की मिट्टी से बनाएं शिव-पार्वती की मूर्ति

  • इनकी पूजा से अखंड सौभाग्य और दाम्पत्य सुख की प्राप्ति होती है।

4. कजरी कथा के बाद दान करें सुहाग की वस्तुएं

  • किसी सुहागिन महिला को साड़ी, चूड़ी, सिंदूर दान करने से घर के संकट दूर होते हैं

5. रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना न भूलें

  • अर्घ्य देते समय यह प्रार्थना करें:

“हे चंद्रदेव, जैसे आप अपनी चांदनी से संसार को प्रकाशित करते हैं, वैसे ही मेरे जीवन में सुख, सौभाग्य और शांति का प्रकाश फैलाएं।”


🌼 कजरी तीज का सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष

कजरी तीज न सिर्फ धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह समूहिक एकता, स्त्री सशक्तिकरण और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक भी है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक गीतों के माध्यम से संस्कृति को सहेजने और साझा करने का कार्य करती हैं।
झूले, मेहंदी, गीत और पारंपरिक वेशभूषा इस पर्व को सांस्कृतिक उत्सव बना देते हैं।


📌

कजरी तीज सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि एक जीवन शैली का उत्सव है, जिसमें आस्था, प्रकृति, परिवार और संस्कृति एक साथ समाहित होते हैं। नीमड़ी पूजन इसका सबसे सुंदर पहलू है, जो नारी शक्ति को प्रकृति के साथ जोड़ते हुए एक सकारात्मक और पवित्र संदेश देता है।


📢 स्वदेश धर्म विशेष रिपोर्ट | कजरी तीज 2025
🗓️ तिथि: 19 अगस्त 2025 (संभावित)
📍 स्थान: सम्पूर्ण उत्तर भारत, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम


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