पुणे/मुंबई | महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुंडमाला में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब इंद्रायणी नदी पर बना एक पुराना पुल अचानक ढह गया। इस हादसे में अब तक दो पर्यटकों की मौत हो चुकी है जबकि 12 से अधिक लोग लापता हैं। पुल के टूटते ही लगभग 24 पर्यटक नदी में बह गए, जिनमें से 12 को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनमें से दो की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
रविवार को भीड़ से भरा था पुल, अचानक टूटा
पुणे के मावल तहसील में स्थित इंद्रायणी नदी का यह पुल मुख्यतः पैदल यात्रियों के लिए था और वर्षों पुराना बताया जा रहा है। रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक इस क्षेत्र में पिकनिक मनाने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पुल पर सौ से अधिक लोग मौजूद थे, तभी अचानक उसकी संरचना कमजोर पड़ गई और बचाव से पहले ही वह नदी में समा गया।

अब भी 12 पर्यटक लापता, रेस्क्यू जारी
NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) और SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। अब तक नदी से 12 पर्यटकों को बाहर निकाला गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
NDRF के अधिकारी दीपक तिवारी ने बताया कि, “हमारी दो टीमें मौके पर हैं। लापता पर्यटकों को ढूंढने के लिए गोताखोरों और सोनार उपकरणों की मदद ली जा रही है।”

प्रशासन की लापरवाही या जनता की अनदेखी?
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस पुल को पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया गया था और उस पर ‘आवागमन वर्जित’ के बोर्ड भी लगाए गए थे। इसके बावजूद रविवार को पर्यटकों की भीड़ ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, जिससे यह हादसा हुआ।
मावल पुलिस स्टेशन के निरीक्षक रणजीत जाधव ने बताया, “यह पुल सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए था, और वह भी सीमित भार के लिए। जब सौ से अधिक लोग एक साथ चढ़े, तब इसका संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में गिर गया।”
मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि,
“इंद्रायणी नदी पर पुराने पुल के ढहने की दुखद सूचना प्राप्त हुई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार कई लोग नदी में बह गए हैं। घायल पर्यटकों का इलाज जारी है और राहत-बचाव कार्य पूरी तत्परता से चल रहा है।”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी लापता लोगों की जल्द से जल्द तलाश हो और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा दी जाए।
सवालों के घेरे में पर्यटन सुरक्षा
यह घटना एक बार फिर से पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलती है। यदि पुल को पहले से असुरक्षित घोषित किया गया था, तो उसे पूर्णतः बंद क्यों नहीं किया गया? क्या वहां सुरक्षा बल या चेतावनी देने वाले कर्मचारी नियुक्त थे? हादसे के बाद ये तमाम सवाल स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप खड़े कर रहे हैं।
स्वदेश ज्योति के द्वारा
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