मध्य प्रदेश में डायल 112 शुरू, एक नंबर से मिलेगी पुलिस, एम्बुलेंस और अग्निशमन सेवा, 16 मिनट में मदद का दावा
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में जनता की सुरक्षा और आपातकालीन सेवा के प्रबंधन में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। 15 अगस्त से शुरू होने वाला नया डायल-112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम जनसुरक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होगा। यह नया सिस्टम पुराने डायल-100 की जगह लेगा, जो पिछले दस वर्षों से प्रदेश में आपातकालीन सेवा का कार्य संभाल रहा था। नए डायल-112 सिस्टम के माध्यम से केवल एक नंबर पर कॉल करके पुलिस, अग्निशमन, चिकित्सा, महिला हेल्पलाइन, साइबर क्राइम और अन्य संबंधित आपात सेवाएं तत्काल उपलब्ध होंगी।
आपातकालीन सेवा में एकीकरण से होगा बड़ा फायदा
भारत सरकार की पहल पर पूरे देश में लागू हो रहे डायल 112 योजना के तहत मध्य प्रदेश में भी विभिन्न आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत किया गया है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि नागरिकों को अब अलग-अलग नंबरों पर कॉल करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। चाहे वह पुलिस की मदद चाहिए, अस्पताल या एम्बुलेंस बुलानी हो, अग्निशमन विभाग को सूचित करना हो, या महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन से संपर्क करना हो — सभी सेवाएं अब डायल 112 के माध्यम से उपलब्ध होंगी।
इसके अतिरिक्त साइबर अपराध, रेल दुर्घटना, सड़क दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, परिवहन विभाग की सहायता, महिला एवं बाल संरक्षण आदि से जुड़ी सेवाएं भी इस एकल नंबर पर इंटीग्रेट की गई हैं। इससे जनता को असमय संकट में तेजी से और सरलता से मदद मिल सकेगी।
रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग से बढ़ेगी त्वरितता
डायल-112 सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है कि यह रियल-टाइम जीपीएस लोकेशन ट्रैकिंग के साथ काम करेगा। जब कोई भी व्यक्ति इस नंबर पर कॉल करेगा, तो सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में स्थित ऑपरेटर तुरंत कॉल करने वाले की सटीक लोकेशन हासिल कर पाएंगे। इसी आधार पर नजदीकी फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (एफआरवी) को तत्काल घटनास्थल पर रवाना किया जाएगा।
मध्य प्रदेश पुलिस के पास इसके लिए लगभग 1,200 जीपीएस से लैस एसयूवी वाहन उपलब्ध होंगे, जो त्वरित पहुंच को सुनिश्चित करेंगे। इस नई व्यवस्था से यह दावा किया जा रहा है कि आपातकालीन स्थिति में औसतन केवल 16 मिनट के भीतर मदद पहुंचाई जा सकेगी। यह समय सीमा वर्तमान में होने वाली सेवाओं की तुलना में काफी बेहतर है।

भोपाल में बनेगा आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के संचालन के लिए राजधानी भोपाल में एक अत्याधुनिक सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र राज्य के सभी जिलों और क्षेत्रों से जुड़े रहेगा और पूरे प्रदेश की आपात सेवाओं की निगरानी करेगा। केंद्र में प्रशिक्षित ऑपरेटर और तकनीकी कर्मी 24×7 सतर्क रहेंगे और प्राप्त कॉल की त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेंगे।
यह कमांड सेंटर न केवल पुलिस बल्कि अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला सुरक्षा एजेंसियों और अन्य सम्बंधित संस्थाओं के बीच समन्वय का भी कार्य करेगा। इससे मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन बेहतर होगा और सेवाएं तेजी से और प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी।
डायल 112 में शामिल प्रमुख सेवाएं
मध्य प्रदेश में डायल 112 के अंतर्गत जो प्रमुख आपातकालीन सेवाएं एकीकृत की गई हैं, वे निम्नलिखित हैं:
- पुलिस आपातकालीन सेवा (पूर्व में डायल 100)
- स्वास्थ्य एवं एम्बुलेंस सेवा (डायल 108)
- अग्निशमन सेवा (डायल 101)
- महिला हेल्पलाइन (डायल 1090)
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन (डायल 1930)
- रेल मदद हेल्पलाइन (डायल 139)
- रोड एक्सीडेंट रिस्पांस सर्विस (हाईवे टोल नाका डायल 1099)
- प्राकृतिक आपदा प्रबंधन (एसडीएमए डायल 1079)
- राज्य परिवहन विभाग की पैनिक बटन सेवा
- महिला एवं बाल संरक्षण हेल्पलाइन (डायल 181, 1098)
इस तरह से प्रदेश के नागरिकों को सभी आपात स्थितियों में केवल एक नंबर से मदद मिलना संभव होगा।
सरकार की प्राथमिकता: त्वरितता और भरोसा
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री और पुलिस प्रमुखों ने डायल-112 सिस्टम को जनता के लिए सुरक्षा की गारंटी बताते हुए कहा है कि यह योजना जनसामान्य के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। वर्तमान समय में आपातकालीन सेवा की सबसे बड़ी समस्या विलंब और बिखरी हुई सेवाएं रही हैं। डायल 112 के आने से इस समस्या का निराकरण होगा और अपराध नियंत्रण, दुर्घटना प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा और महिला सुरक्षा जैसी जरूरतों का तुरंत समाधान होगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि इस योजना के तहत पुलिस और आपात सेवाओं की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आम जनता में सुरक्षा और भरोसे की भावना मजबूत होगी।
डायल 112: देश में एक आम नंबर
डायल 112 को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है और कई राज्यों में यह पहले से काम कर रहा है। मध्य प्रदेश में भी इसके लागू होने से यह सुनिश्चित होगा कि आपातकालीन सेवा प्रणाली एक समान और प्रभावी हो। पूरे भारत में डायल 112 को ही आपातकालीन सेवा का एकमात्र नंबर मान्यता दी जा रही है।
आगे की चुनौतियां और उम्मीदें
हालांकि डायल-112 का कार्यान्वयन बड़े पैमाने पर सुधार का संकेत है, लेकिन इसके सफल संचालन के लिए व्यापक जागरूकता अभियान, प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता और तकनीकी ढांचे का मजबूत होना जरूरी है। इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इस सेवा की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की चुनौती होगी।
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना जनसुरक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी और मध्य प्रदेश को एक सुरक्षित और आपात सेवा के लिए तत्पर राज्य बनाएगी।
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